हाथरस। जिले में खाद्य सुरक्षा कानून मजाक बनकर रह गया है। अधिनियम के तहत जारी राशन कार्डों में अपात्रों को तीन-तीन राशन कार्ड जारी किए गए हैं, जबकि वास्तविक हकदार अब भी राशन कार्ड के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। फर्जी राशन कार्डों से डीलर जरूरतमंदों के हक का राशन खुद हड़प रहे हैं और हर महीने मोटी कमाई कर रहे हैं। आपूर्ति विभाग तक भी इसकी शिकायतें पहुंची हैं, जिसके बाद पूरे जिले में राशन कार्डों का 15 से 31 मई तक दोबारा सत्यापन कराने का निर्णय लिया गया है। अभियान में छूटे हुए लोगों के भी राशन कार्ड बनवाने के लिए फॉर्म भरवाए जाएंगे।
सरकार ने अब खाद्य सुरक्षा कानून के तहत जिले के सभी वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को खाद्य सुरक्षा गारंटी योजना में शामिल किया है, जिससे इन कमजोर वर्ग के लोगों को दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो के हिसाब से खाद्यान्न वितरित कराया जा सके और यह गरीब परिवार आराम से दो वक्त की रोटी खा सकें, लेकिन सरकारी सर्वे में तो गांव की राजनीति के चलते बडे़ पैमाने पर गड़बड़ी करा दी गई हैं। राशन की दुकान संचालकों ने अपना गोरखधंधा चलाने के लिए बडे़ ही आसान तरीके से फर्जी नाम-पतों से बनवाए गए राशन कार्डों को माध्यम बना रखा है। एक-एक व्यक्ति के दो-दो और तीन-तीन राशन कार्ड जारी होने से इन दुकानदारों को एक ही व्यक्ति के नाम पर तिहरा राशन मिल रहा है, जिससे एक कार्ड का तो राशन उपभोक्ता को दिया जा रहा है, जबकि बचे हुए एक और दो राशन कार्डों का राशन हजम किया जा रहा है, लेकिन जिला प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान ही नहीं है।
-जिले में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जारी किए गए राशन कार्डों में इस तरह की खामियों की शिकायतें आई हैं। खामियों को दूर कराने के लिए पंचायत सेक्रेटरी के माध्यम से सत्यापन कराया जा रहा है, जोकि 15 से 31 मई तक होगा। इसके आधार पर अपात्रों के नाम हटाए जाएंगे, जबकि पात्रों के नाम इस सूची में शामिल कराने के प्रयास किए जाएंगे।
-सुनील सिंह, डीएसओ हाथरस