प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में क्षेत्र के गांव नगला फतेला का जिक्र आने के बाद दिल्ली से हाथरस तक मची हलचल थमी नहीं है। खासकर केंद्र सरकार की तरफ से इस बारे में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) को नोटिस दिए जाने के बाद तो गांव में बिजली अधिकारियों की सक्रियता और बढ़ गई है।
गुरुवार को भी गांव में बिजली सप्लाई चालू करने के लिए लाइन एवं ट्रांसफार्मर्स की जांच-पड़ताल की गई, लेकिन सप्लाई चालू नहीं हुई। एक युवक गांव में घर-घर जाकर सर्वे करता हुआ मिला। अमर उजाला टीम के पूछने पर उसने अपना नाम-पता बताने से इंकार कर दिया। पूछने पर इतना जरूर कहा कि मैं हाथरस से आया हूं।
जिस तरह गांव में 70 साल से बिजली नहीं होने का सवाल उठाया गया है। उसकी पड़ताल की गई तो ग्रामीणों ने माना कि गांव में बिजली सप्लाई तो करीब 40 साल पहले से है। करीब 25 साल से ग्रामीण एलटी लाइनों पर केबल डालकर बिजली का उपयोग भी कर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार विद्युतीकरण होने से पहले के ही गांव में करीब 115 कनेक्शन हैं। इनके बिल भी आते हैं। वर्ष 2015 में पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में गांव में 98 पोल, पांच ट्रांसफार्मर और 20 घरों पर मीटर भी लगाए गए, लेकिन काम अधूरा ही रहा।
यही कारण है कि चार दिन में भी सप्लाई चालू नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि एक साल से विद्युतीकरण वाली लाइन में सप्लाई क्यों नहीं छोड़ी गई है।