सहपऊ क्षेत्र में आम लोगों के करीब 200 बैंक खातों को कथित तौर पर साइबर ठगी और करोड़ों रुपये के लेनदेन में इस्तेमाल किए जाने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। करीब दो महीने से चल रहे इस प्रकरण में अब तक दो एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, फिर भी पुलिस के हाथ खाली हैं।
साइबर अपराध से जुड़े मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं नहीं लगाने पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि सभी खाते डिजिटली खोले गए थे। खास बात यह है कि दोनों मुकदमों में केवल बीएनएस की धारा 318(4) लगाई गई है। मामला अब तक सहपऊ थाने तक सीमित रहा और जांच के लिए साइबर सेल तक नहीं पहुंच सका। न ही इस मामले में कोई गिरफ्तारी हुई।
झारखंड के जामताड़ा में ऑनलाइन ठगी के कारण इस जिले को देश की फिशिंग राजधानी के नाम से भी जाना जाता है। इसी तर्ज पर सहपऊ में बैंक खाते खोलने के लिए युवाओं का नेटवर्क बनाया गया। साइबर ठगों से सीधे जुड़े युवकों ने जरूरतमंद युवाओं को प्रत्येक खाते पर मोटे कमीशन का लालच दे उन्हें बैंक खाते खोलने का टारगेट दे दिया।
इन युवकों ने फिर केवाईसी पर कैशबैक व बैंक में नौकरी लगवाने का झांसा देकर धड़ाधड़ खाते खुलवाए। आगरा की डीसीबी, डीबीएस व नैनीताल बैंक में खोले गए इन खातों में साइबर ठगों द्वारा करीब 60 करोड़ रुपये खपाए जाने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में करीब 70 खातों की पहचान हो गई है, जिनमें 10 लाख से लेकर 70 लाख रुपये तक की रकम ठिकाने लगाई गई है।
एफआईआर में मोबाइल या डिजिटल शब्द का जिक्र तक नहीं
सहपऊ में यह मामला पिछले दो महीने से चर्चाओं में है, लेकिन पहली एफआईआर 12 अगस्त को दर्ज हुई। मोहल्ला बरीवाला के आकाश ने साफ बताया कि उसके व उसके परिवार के खाते मोबाइल फोन से ऑनलाइन खोले गए, लेकिन एफआईआर में इस बात का जिक्र नहीं किया गया, इसलिए केवल धोखाधड़ी में रिपोर्ट दर्ज हुई। 15 दिन बाद दर्ज हुई दूसरी एफआईआर में भी यही हुआ। गांव नगला सेवा के दीपक कुमार की तहरीर में नौकरी के नाम पर दस्तावेज लेने व खाते खुलवाने का जिक्र है। पहली एफआईआर में सहपऊ के प्रतीक, प्रसून और अनंत कौशिक का नाम था। दूसरी एफआईआर में इन तीनों के अलावा गांव ढकपुरा के हर्ष और निशांत तथा नगला सुखराम के गौरव के नाम शामिल हुए।
मामले में 35 लाख की चर्चा
सहपऊ से निकलकर अब यह मामला जिले की सुर्खियों में आ चुका है। कारण है कि प्रकरण में 35 लाख रुपये व मथुरा एक कथित महामंडलेश्वर की चर्चाएं तेजी से हो रही हैं। सूत्रों के अनुसार गिरोह के सरगना ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए इस कथित महामंडलेश्वर के माध्यम से करीब 35 लाख रुपये में समझौता कराने का प्रयास किया। चर्चा है कि किसी स्तर पर बात नहीं बनने पर दो दिन पहले रकम भी वापस की गई है। दूसरी एफआईआर को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
लोगों को धोखे में रखकर बैंक खाते खुलवाने का मामला गंभीर है। साइबर फ्रॉड से मामला जुड़ा होने के कारण विवेचना साइबर सेल को ट्रांसफर किया जा रहा है। गिरोह से जुड़े किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी