जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं की सेहत में सुधार और शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से मदर मिल्क बैंक बनने की उम्मीद फिर जाग गई है। अस्पताल परिसर में निष्प्रयोज्य पुरानी इमरजेंसी को हटाकर उस जगह पर इसका निर्माण कराया जाएगा।
इसके साथ ही वहां एमएनसीयू का भी निर्माण कराया जाएगा, जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। दरअसल, शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से करीब चार साल पहले शासन ने जिला महिला अस्पताल से इसका प्रस्ताव मांगा था, लेकिन अस्पताल में पर्याप्त जगह न होने से यह प्रस्ताव लटका था।
हाल ही में डीएम अतुल वत्स ने अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान सामने आया कि एसएनसीयू में मात्र 12 बेड हैं और एमएनसीयू के लिए भी जगह नहीं है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने पुरानी व निष्प्रयोज्य हो चुकी इमरजेंसी की जगह का उपयोग करने और इसके लिए जल्द से जल्द प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
क्यों जरूरी है मदर मिल्क बैंक?
चिकित्सकों के अनुसार, शून्य से छह माह तक के बच्चे के लिए केवल मां का दूध ही सर्वोत्तम आहार होता है, जो उसे बीमारियों से लड़ने की शक्ति (इम्युनिटी) देता है। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे या जिन नवजातों की माताएं किसी कारणवश दूध पिलाने में असमर्थ होती हैं, उन्हें सही पोषण नहीं मिल पाता है। यह बैंक ऐसे बच्चों के लिए जीवनदान साबित होगा।
मिल्क बैंक की प्रमुख बातें ..
स्वैच्छिक रक्तदान की तरह दुग्धदान : इच्छुक और स्वस्थ धात्री माताएं (स्तनपान कराने वाली महिलाएं) इस बैंक में स्वेच्छा से अपना अतिरिक्त दूध दान कर सकेंगी। पंप की मदद से उन माताओं का दूध भी संरक्षित किया जाएगा, जो सीधे तौर पर दूध पिलाने में खुद अक्षम हैं या फिर बच्चा भर्ती है।
पाश्चराइजेशन तकनीक : दान किए गए दूध को सीधे बच्चों को नहीं दिया जाएगा, बल्कि वैज्ञानिक तरीकों (पाश्चराइजेशन) से उसकी गहन जांच की जाएगी और उसे पूरी तरह शुद्ध व कीटाणुरहित किया जाएगा।
डीप फ्रीजर में स्टोरेज : शुद्धिकरण के बाद इस दूध को विशेष डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा जाएगा, जहां यह तीन महीने तक पूरी तरह सुरक्षित और उपयोग के योग्य रहेगा।
जिला महिला अस्पताल जगह की कमी से जूझ रहा है। वर्तमान में रोजाना 15 से 20 प्रसव हो रहे हैं। साथ ही एसएनसीयू भी फुल चल रहा है, इसलिए मदर मिल्क बैंक बनाने में समस्या आ रही थी, इसलिए अब पुरानी इमरजेंसी वाली जगह को प्रयोग करने पर विचार चल रहा है।
-डाॅ. डीएम सक्सेना, सीएमएस