फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hathras News: अंतरिक्ष में उपग्रहों के बीच मजबूत नेटवर्क के लिए तैयार कर रहे मॉडल

Wed, 02 Jul 2025 01:39 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले के निवासी दो युवाओं के साथ तीन सदस्यीय टीम ने अंतरिक्ष में दो उपग्रहों के बीच मजबूत नेटवर्क रखने वाला एक मॉडल तैयार किया है। इसका चयन एमएसएमई आइडिया हैकथान 4.0 में चयन कर लिया गया है। शासन स्तर से इस मॉडल को पूरी तरह से तैयार किए जाने के लिए 15 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है।
विज्ञापन




दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्र रहे मुरसान के गांव करील निवासी सतेंद्र सिंह के पुत्र कृष्णनेंद्र सिंह दिल्ली यूनिवर्सिटी की फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। शहर के ग्रीन वैली रमनपुर निवासी पवन कुमार पुत्र देवदत्त सिंह आईईटी लखनऊ में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। इन दोनों के अलावा बिहार की रहने वाली डीयू की छात्रा तनीशा बाघेश्वरी पुत्री संतोषराम ने मिलकर अंतरिक्ष में नेटवर्क मजबूत करने वाला मॉडल तैयार किया है।



कृष्णनेंद्र ने बताया कि पवन कुमार ने वर्ष 2024 में सूरत की संस्था एसटीएआर में एक महीने की इंटर्नशिप की। वहां उन्होंने उपग्रह डिजायन और फ़ैब्रिकेशन की बुनियादी बातें सीखीं। इस दौरान अंतरिक्ष तकनीक की चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर मिला। चंद्रयान-2 की घटना भी याद आई, जब अंतिम समय में लैंडर का सिग्नल टूट गया था।
विज्ञापन




इसे देखते हुए तीनों ने मिलकर सोचा कि अगर उस समय कोई ऐसा सिस्टम होता, जो सिग्नल को मजबूत कर पाता तो मिशन पूरी तरह सफल हो सकता था। यहीं से हमने क्यूब संचार का विचार मिलकर विकसित किया। हमारा विचार था कि क्यों न ऐसे छोटे, हल्के और कम लागत वाले उपग्रह बनाए जाएं, जो दो सैटेलाइट्स के बीच सिग्नल को मजबूती से बढ़ा सकें। खासकर तब, जब वह एक-दूसरे की सीधी पहुंच में न हों।



कृष्णनेंद्र ने बताया कि एसटीएआर सूरत में सनी काबरावॉल से मिली सीख और सलाह ने हमें इसे और स्पष्ट करने में मदद की। इसके बाद हमारी टीम ने मिलकर इस उपग्रह नेटवर्क का डिज़ाइन तैयार किया जो टिकाऊ, हल्का और पर्यावरण के अनुकूल हो। इसका उद्देश्य है धरती और चांद की कक्षा में घूमते हुए सिग्नल को मज़बूती देना, ताकि चांद के उस हिस्से से भी संपर्क बना रहे, जो हमेशा धरती से छिपा रहता है।



कृष्णनेंद्र ने बताया कि हमारे इस प्रोजेक्ट का चयन एमएसएमई हैकथान 4.0 में हुआ है, जिसमें भारत सरकार ने 15 लाख रुपये के निवेश को स्वीकृति दी है। हमारा लक्ष्य है कि यह तकनीक न केवल अंतरिक्ष अभियानों के लिए उपयोगी हो, बल्कि भविष्य में इसे कम लागत पर टेलीकॉम कंपनियां और शोध संस्थान भी इस्तेमाल कर सकें।



उन्होंने बताया कि हमारी इस सफलता के लिए अपने माता-पिता का भी दिल से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमें हमेशा प्रोत्साहित किया। उन्होंने एसटीएआर के निदेशक सन्नी का विशेष धन्यवाद करते हैं, जिनके मार्गदर्शन और प्रेरणा ने हमारे विचार को आकार देने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाॅ. दीप्ती रंजन का भी आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इन्हें एंटीना की बुनियादी जानकारी देकर तकनीकी पक्ष को मजबूत किया बनाने में मदद की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें