मनरेगा की तर्ज पर रोजगार गारंटी कार्ड बनाया जाएगा जबकि 170 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाएगी।
जिले में मनरेगा की स्थिति बेहद खराब है। यहां विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण काम मांगने वाले ग्रामीणों को काम तक नहीं मिल पा रहा है। यह मामला मनरेगा की एक रिपोर्ट में निकलकर सामने आया है। हालांकि विभागीय अधिकारी और कर्मचारी जॉब कार्डों का लक्ष्य पूरा कर अपनी खानापूर्ति करने में लगे हुए है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ना था। जिले में 7248 परिवारों को मनरेगा से रोजगार नहीं मिल सका है।
इस योजना का लक्ष्य ग्रामीणों को अपने गांव से पलायन करने से रोकना था। इसके लिए शासन ने मनरेगा के तहत गांव में ही रोजगार मुहैया कराने योजना बनाई थी। जिले में यह योजना दम तोड़ रही है। यहां 20719 परिवारों ने अपने गांव में काम करने के लिए विभाग से डिमांड की थी।
इसके आधार पर विभाग की ओर से 13471 परिवारों को ही काम मुहैया हो सका। जबकि मनरेगा के तहत काम मांगने वाले प्रत्येक व्यक्ति को काम उपलब्ध कराना है। शासनादेश के अनुसार आवेदक को अगर 15 दिवस के अंदर कार्य उपलब्ध नहीं होता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता विभागीय स्तर से दिलाया जाएगा।