रेस्क्यू के लिए भेजी गई टीम के लौटने तक उनका कोई अता-पता नहीं चल सका। सात अगस्त को सेना के सीओ रैंक के अधिकारी ने फोन पर सचिन के माता-पिता को बताया कि उनका बेटा सचिन लापता है। जैसे ही यह खबर परिजनों को मिली तो परिवार में शोक की लहर दौड़ गई थी। तभी से सचिन के परिजन, ग्रामीण, रिश्तेदार मायूस हैं।
परिजन बोले- सचिन का मुंह देखने की आस दिल में ही रह गई
परिजनों का कहना है कि अब सचिन का मुंह देखने की उनकी आस दिल में ही रह गई है। पिता चंद्रवीर, मां लक्ष्मी और बहन श्वेता रोजाना मंदिर में सचिन के सही सलामत वापस आने की प्रार्थना कर रहे थे, लेकिन अब उनको मृत घोषित किए जाने के बाद परिजनों की सभी उम्मीदें टूट गईं हैं। परिजनों का कहना है कि सचिन जब सेना में गए थे तो बहन श्वेता ने उनसे जीवन में आगे बढ़ने की उम्मीद की थी।
एसडीएम सदर राजबहादुर सिंह ने कहा है कि 5 अगस्त को बादल फटने से हुई तबाही में लापता हुए 14वीं बटालियन दी राजपूताना राइफल्स के अग्निवीर सचिन पौनिया निवासी गांव करील को उपजिला मजिस्ट्रेट, भटवाड़ी, उत्तरकाशी द्वारा 18 दिसंबर को मृत घोषित किया गया है। उन्होंने इस संबंध में 30 दिन के भीतर आपत्ति भी मांगी है।
आखिरी बार 4 अगस्त को सचिन से परिजनों की हुई थी बात
सचिन से उनके पिता, मां व बहन की आखिरी बार चार अगस्त को फोन पर बात हुई थी। दूसरे दिन पांच अगस्त को उत्तरकाशी के गांव हर्षिल में आई बाढ़ व मलबे की घटना में सचिन लापता हो गए थे। सचिन के साथ अन्य 10 जवान थे, जिसमें एक जवान का शव क्षत-विक्षत हालत में मलबे में दबा मिला था। सेना के अधिकारियों ने लापता जवानों के परिजनों को उत्तरकाशी बुलाया था। वहां उनके परिजनों के डीएनए सेंपल लिए गए, लेकिन उस शव से लापता सचिन के पिता चंद्रवीर सिंह का डीएनए मैच नहीं हुआ था।