हाथरस। जिले में मनरेगा के तहत भी ग्रामीण क्षेत्र में कामगार को भी काम नहीं मिल सका। मनरेगा के अप्रैल माह के आंकड़ों ने पूरी कलई खोलकर रख दी है। हालांकि केंद्र सरकार राष्ट्रीय महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के माध्यम से ग्रामीण मजदूरों का रोजगार देने का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। जिले में माह अप्रैल में लक्ष्य के सापेक्ष मजदूरी दिलाने में ग्राम्य विकास महकमा फेल साबित रहा है।यहां तक कि सासनी ब्लॉक में तो मात्र 64 लोगों को ही रोजगार मिल सका है।
ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों का शहरों की ओर पलायन रोकने के लिए केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा एक्ट लागू किया गया था। एक्ट को लेकर सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि ग्रामीण मजदूरों का मनरेगा श्रमिक के रूप में पंजीकरण करते हुए उन्हें साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार दिया जाए। यहां जिला स्तर पर हर साल लेबर बजट का सही प्रयोग नहीं हो पाने के कारण इसमें साल दर साल कटौती होती रही।
विभागीय लक्ष्य के सापेक्ष अप्रैल माह में जनपद में सभी सात ब्लाकों में 48,922 श्रमिकों को काम दिया जाना था, लेकिन इसके सापेक्ष महज 18,801 मानव दिवस ही पूरे हो सके। इन आकंड़ों के आधार पर मनरेगा वित्तीय वर्ष के शुरुआत में ही धरातल पर आ गिरी है।