गांव जंगला में शहीद सुरेश कुमार के स्मारक की जर्जर छत। संवाद
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एक तरफ स्वतंत्रता दिवस पर बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने की तैयारी की जा रही है तो दूसरी तरफ उनके परिवारों और उनकी याद में बनाए गए स्मारकों की अनदेखी की जा रही है। कुछ बलिदानियों की याद में तो अभी तक न तो स्मारक बने हैं और न हीं उनके परिवारों की समस्याओं का समाधान हुआ है।
भूतिया निवासी सत्यवीर सिंह सात जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। बताया जाता है कि ग्रेनेड हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने करीब 24 घंटे तक मोर्चा संभाले रखा और 18 दुश्मनों को ढेर किया। उनकी वीरता आज भी क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
ग्रामीणों का कहना है कि बलिदानी की स्मृति में भव्य शहीद द्वार, स्मारक और वहां तक पक्का रास्ता बनाने का वादा वर्षों से अधूरा है। वहीं गांव जंगला के कारगिल बलिदानी सुरेश कुमार के स्मारक की छत जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह दरारें पड़ने से स्मारक की हालत खराब है। परिजनों ने प्रशासन से छत का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
इसी तरह बलिदानी चौधरी चंदन सिंह 10 फरवरी 2003 को मणिपुर में नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान देश की रक्षा करते हुए बलिदान हुए थे। उनकी मूर्ति तो स्थापित हो चुकी है, लेकिन स्मारक के चारों ओर बाउंड्री न होने से आवारा पशु परिसर में पहुंचकर गंदगी करते हैं। स्मारक का कच्चा रास्ता भी कीचड़ और जलभराव से बदहाल है। परिजनों ने रास्ते को पक्कान कराने और स्मारक पर चहारदीवारी बनवाने की मांग की है।
एसडीएम रितु सिरोही ने बताया कि खंड विकास अधिकारी सुरेश कुमार को तत्काल मौके पर भेजकर बलिदानियों के स्मारकों का निरीक्षण कराया जाएगा। निरीक्षण के बाद आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।