मंडी समिति में धान की भारी आवक के चलते बनी अव्यवस्था के बाद बृहस्पतिवार को एक बार फिर किसानों के लिए मंडी के गेट खोल दिए गए। गेट खुलते ही मंडी परिसर और बाहर की मुख्य सड़कों पर धान लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली और लोडर वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं।
गौरतलब है कि बुधवार को मंडी में जगह पूरी तरह भर जाने के कारण प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे। वाहन अंदर न जाने देने पर किसानों और मंडी कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई थी, जिसके चलते बुधवार को धान की खरीद काफी प्रभावित रही। किसानों को अपनी उपज की सुरक्षा के लिए पूरी रात खुले आसमान के नीचे फसल की रखवाली करनी पड़ी।
सुचारु व्यवस्था के तहत कराई गई एंट्री
बृहस्पतिवार सुबह से ही स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एक-एक कर वाहनों को मंडी के अंदर प्रवेश दिया गया। जाम की स्थिति से बचने के लिए खाली होने वाले ट्रैक्टरों को पिछले दरवाजे से बाहर निकाला गया। दिन भर में मंडी में कुल 40 हजार क्विंटल धान की खरीद दर्ज की गई।
निकासी तेज : पंजाब और हरियाणा भेजा जा रहा धान
मंडी में जगह की कमी को देखते हुए व्यापारियों ने धान की निकासी पर विशेष जोर दिया है। मिलों के एजेंटों ने खुली बोली लगाकर धान की खरीदारी की। इसके बाद धान के बोरों को 18 टायरा बड़े ट्रकों में लादकर पंजाब और हरियाणा की राइस मिलों के लिए रवाना किया गया। बृहस्पतिवार को लगभग 45 हजार क्विंटल धान की निकासी की गई, जिससे मंडी में नए माल के लिए जगह बन सकी।
हाथ से कटे धान की मांग अधिक, मिल रहे बेहतर दाम
हाथ से कटा धान : गुणवत्ता और कम नमी के कारण हाथ से कटे धान की हाथों-हाथ बिक्री हो रही है। इसके भाव किसानों को 4,200 से 4,300 प्रति क्विंटल तक मिल रहे हैं।
कंबाइन से कटा धान: कंबाइन हार्वेस्टर से काटे गए धान में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण इसके दाम 4,000 प्रति क्विंटल से नीचे बने हुए हैं।
आवक बढ़ने के बावजूद किसानों की सुविधा का हर संभव ध्यान रखा जा रहा है। खरीद और उठान की प्रक्रिया को बेहतर बनाकर व्यवस्था को दुरुस्त रखा जा रहा है ताकि किसी भी किसान को परेशानी न हो।
अनिल कुमार, मंडी सचिव