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मानिकपुर से फोर्स हटा, सन्नाटा बरकरार

Fri, 10 Feb 2017 10:51 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
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मा‌िनकपुर में घटना के बाद पसरा सन्नाटा। - फोटो : अमर उजाला
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गांव मानिकपुर में सपा और बसपा समर्थकों के बीच हुई खूनी भिड़ंत में बिसाना के पुष्पेंद्र उर्फ पुष्पे की मौत के बाद से मानिकपुर के बाजारों में सन्नाटा पसरा है। लोग मौके पर जाने से कतरा रहे हैं। शुक्रवार को घटनास्थल पर तैनात पुलिस बल और अर्द्धसैनिक बलों को हटा लिया गया। बावजूद इसके कस्बे का माहौल सामान्य नहीं हो पा रहा। हालांकि सहपऊ थाने पर भी अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती रही।
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सड़क के एक ओर और पुल के नीचे अस्थायी तौर पर लगी दुकानों के दुकानदार ग्राहक आने का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। राहगीर घटनास्थल को देखकर निकल रहे हैं। घटना के दिन घटनास्थल के पास लगी हाट में अभी तक न के बराबर दुकानदारी हुई है। सब्जी विक्रेता भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। स्थानीय लोग चुनाव सकुशल शांतिपूर्ण और संपन्न होने की कामना कर रहे हैं। लोगों का कहना कि सियासी संघर्ष का खामियाजा लोगों को भी झेलना पड़ रहा है। वहीं घटनास्थल से फोर्स हटाने के सवाल पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मतदान के कारण मौके से फोर्स हटाया गया है। हालांकि दोनों प्रत्याशियों और उनके समर्थकों पर पूरी नजर रखी जा रही है। 

पूरे क्षेत्र में फोर्स ने किया फ्लैग मार्च
बसपा समर्थक की हत्या के बाद सादाबाद और सहपऊ क्षेत्र में गुरुवार को पूरी रात पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने जमकर पसीना बहाया। बहाया। शुक्रवार को भी चुनाव से पूर्व कस्बे और गांवों में फ्लैग मार्च कर शांतिपूर्ण चुनाव का संदेश दिया। फोर्स ने संवेदनशील गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान पुलिस उनके साथ मौजूद रही। मालूम हो कि सादाबाद का चुनाव पहले से संवेदनशील था। मानिकपुर की घटना के बाद से पुलिस के लिए चुनाव को शांतिपूर्ण संपन्न कराना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। 
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आखिर कैसे हुआ झगड़ों में असलहों का प्रयोग?
मानिकपुर में बसपा समर्थक की गोली मारकर हत्या किए जाने की वारदात ने पुलिस की उस तैयारी पर सवाल खड़ा कर दिया है, जो चुनाव से महीनों पहले पुलिस अधिकारियों ने शुरू कर दी थी। हजारों की संख्या में लोगाें को पाबंद किया गया, लेकिन सपा-बसपा समर्थकों के बगुली में भिड़ने के बाद भी इन्हें पाबंद नहीं किया गया। दूसरा सबसे अहम सवाल यह है कि समर्थकों के बीच फायरिंग हुई कैसे? उनके पास असलहे कैसे आए। अगर उनके हथियार लाइसेंसी थे तो अभी तक पुलिस ने जमा क्यों नहीं कराए और अगर हत्याकांड को अवैध हथियाराें से अंजाम दिया गया तो पुलिस समर्थकों से इनकी बरामदगी पहले ही तलाशी कर क्यों नहीं कर सकी। ऐसे कई सवाल सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। 
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