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हाथरस: बिसावर के घाटमपुर में नहीं थम रहा लंपी का प्रकोप, पांच गोवंश की मौत, दो दर्जन से अधिक गोवंश संक्रमित

Mon, 21 Sep 2026 10:13 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

ग्रामीणों का आरोप है कि 1962 टोल-फ्री नंबर पर बार-बार कॉल के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही और निजी डॉक्टरों से महंगा इलाज कराना पड़ रहा है, ग्रामीणों ने तुरंत पशु चिकित्सा टीम भेजने की मांग की है(
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प्रभुदयाल निवासी घाटमपुर की लंपी जैसी बीमारी से पीड़ित गाय - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बिसावर की ग्राम पंचायत घाटमपुर में लंपी जैसी बीमारी का प्रकोप थम नहीं रहा। इस बीमारी से अब तक दो दर्जन से अधिक गोवंश संक्रमित हो चुके हैं। इधर, पशुपालकों का दावा है कि पिछले 10 दिनों में पांच पशुओं की दर्दनाक मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी टोल-फ्री नंबर 1962 पर बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं है।

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गांव में लंपी वायरस की स्थिति भयावह रूप ले चुकी है। संक्रमित गोवंश के शरीर पर उभरीं गांठें फूटकर गहरे घाव में बदल गई हैं, जिनमें कीड़े पड़ रहे हैं। कई पशुओं की खाल सड़कर गिरने लगी है और दुधारू गायों का दूध उत्पादन पूरी तरह गिर गया है। ग्रामीण दिन-रात अपने पशुओं की देखभाल कर रहे हैं और निजी चिकित्सकों से महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। इसके बावजूद पशुओं की हालत में सुधार नहीं हो रहा है।

सादाबाद क्षेत्र में लंपी के मरीज तो आ रहे हैं। गांव घाटमपुर में टीम भेजकर पशुओं की जांच कराई जाएगी।-डाॅ. विजय सिंह यादव, मुख्य चिकित्साधिकारी हाथरस।  


इन पशुपालकों के गोवंश ने तोड़ा दम
ग्रामीणों के अनुसार, पूरनमल, योगेंद्र, सोनू, चंद्रपाल और अनिल के गोवंश समेत लोकेश की एक बछिया की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। इसके अलावा प्रभुदयाल के चार, योगिता देवी के तीन, रामकिशन के दो और लोकेश का एक, शिवकुमार का एक गोवंश और चंद्रवीर सिंह की नौ माह की गाभिन गाय मरणासन्न स्थिति में तड़प रही है।

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ग्रामीण बोले-1962 हेल्पलाइन बनी शोपीस 
आक्रोशित ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं की जान बचाने के लिए उन्होंने 1962 टोल-फ्री नंबर पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकला। कभी कॉल कनेक्ट नहीं होता तो कभी कोई फोन उठाने वाला नहीं होता। बेबस ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गांव में तुरंत पशु चिकित्सा टीम भेजकर जांच और नि:शुल्क उपचार की मांग की है।
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