सरस्वती के नाम से विभाग में 22 साल से कौन शिक्षिका नौकरी कर रही थी। इसके बारे में विभाग अब आवश्यक सबूत तैयार करने में जुटा हुआ है। अब विभाग मृत महिला के खिलाफ निलंबन एवं वसूली की कार्रवाई तो प्रस्तावित कर नहीं सकता, इसलिए विभाग अब उक्त मामले में फर्जी तरीके से नौकरी कर रही महिला तक पहुंचने के प्रयास में जुट गया है, जिससे उसके खिलाफ विधिवत रूप से कार्रवाई की जा सके। खास बात तो यह है कि बीएसए ने अप्रैल 2017 में इस शिक्षिका का वेतन रोकने के आदेश जारी किए थे। बावजूद इसके उसको वेतन का भुगतान बराबर होता रहा।
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति में फर्जीवाड़े की भरमार है। जब भी किसी शिक्षक की शिकायत मिलती है, अधिकांश की लगातार पुष्टि हो रही है। हाल ही में पूर्व माध्यमिक विद्यालय कथरिया में मृत महिला सरस्वती के नाम से जो शिक्षिका नौकरी कर रही थी, उसका बेसिक शिक्षा विभाग अब पता लगाने में जुट गया है।
विभाग के सामने एक और नई मुसीबत खड़ी हो गई है कि इस शिक्षिका को उसके नाम से लगातार भेजे जा रहे उपस्थित होने के लिए नोटिस रिसीव ही नहीं हुए हैं। इन सभी मुद्दों पर अब बेसिक शिक्षा अधिकारी गंभीरता से जांच कराने लगी है, क्योंकि उनका मानना है कि जब नोटिस रिसीव नहीं हो रहे थे। खंड शिक्षा अधिकारी मुरसान को भी इस मामले में अवगत कराया गया, लेकिन बीईओ के स्तर पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी, यह भी विभाग के लिए समस्या बन गई है। विभागीय अधिकारी अब इस मामले में क्या करें, क्या न करें, इसको लेकर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
प्रकरण सामने आने के बाद महिला का पता लगवाया जा रहा है कि कौन महिला थी जो मृत महिला के नाम पर शिक्षिका की नौकरी कर रही थी। पता लगने के बाद इस मामले में कार्रवाई जाएगी।
रेखा सुमन बीएसए