किसानों का आरोप है कि सुबह और दोपहर कई बार समिति पर खाद लेने गए, लेकिन हर बार ताला ही मिला। कोई कर्मचारी भी मौजूद नहीं रहता, जिससे सही जानकारी तक नहीं मिल पाती। सहकारी समिति मनमानी का केंद्र बनकर रह गई है।
बिसावर क्षेत्र के गांव मीरपुर की ग्रामीण सहकारी समिति पर पिछले 10 दिनों से ताला लटका है। 23 जून को खाद वितरण के बाद समिति बंद होने से किसान यूरिया के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
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समय पर खाद नहीं मिलने से बाजरा, ज्वार और धान की फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी है, जबकि मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से महंगे दामों पर यूरिया खरीदनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि समिति पर कई दिनों से कोई कर्मचारी नहीं मिल रहा और न ही खाद उपलब्ध है। इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ किसानों की परेशानी भी लगातार बढ़ रही है।
किसान मुन्ना सिंह ने बताया कि सुबह और दोपहर कई बार समिति पर खाद लेने गए, लेकिन हर बार ताला ही मिला। कोई कर्मचारी भी मौजूद नहीं रहता, जिससे सही जानकारी तक नहीं मिल पाती। मोहन सिंह ने कहा कि समय पर खाद नहीं मिलने से किसानों की लागत बढ़ रही है। सहकारी समिति मनमानी का केंद्र बनकर रह गई है। धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि आलू की बुवाई के समय डीएपी नहीं मिली थी, अब यूरिया की भी किल्लत है। बाजार में खाद महंगे दामों पर मिल रही है और कई जगह अन्य सामान खरीदने की शर्त भी रखी जा रही है।
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ग्रामीणों ने समिति को नियमित रूप से खोलने और कर्मचारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की मांग की है। उधर, समिति के सचिव बृजमोहन गौतम का कहना है कि जल्द ही सभी किसानों को नियमानुसार यूरिया का वितरण कराया जाएगा।