अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या दो त्रिलोकपाल सिंह के न्यायालय ने भंडारे से लौट रहे एक महात्मा की गोली मारकर हत्या करने वाले तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। न देने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
एडीजीसी शिवेंद्र सिंह चौहान के अनुसार घटना तीन जून 1992 समय करीब रात नौ बजे की है। चार जून की रात सवा 12 बजे थाना सिकंदराराऊ में हरनारायण ने तहरीर देकर कहा था कि उसके ताऊ रामचंद्र पुत्र दयाराम निवासी सुम्मेरपुर काफी समय से महात्मा हो गए थे। तीन जून की रात करीब नौ बजे गांव कि अतिबल दत्तक पुत्र धनसिंह के घेर से भंडारे से लौट रहे थे।
पीछे से आते हुए रामचंद्र का बेटा अनार सिंह, कुलपति सिंह पुत्र धन सिंह, गोपीचंद्र पुत्र मोतीराम, महाराज सिंह पुत्र टेक सिंह निवासीगण गांव सुम्मेरपुर, अनार सिंह के साले हरिश्चंद्र, लाखन सिंह पुत्रगण हंसराज निवासीगण तिलसई थाना-कासगंज हाथों में कट्टे लेकर दौड़ते हुए आए और उसके ताऊ रामचंद्र पर फायर कर दिए, जिससे वहीं गोली लगने से उनकी मृत्यु हो गई।
यह वाकया उसने व गांव के गंगा सिंह, उसके भाई गजाधर सिंह ने नलकूप के ऊपर जलते हुए बल्व की रोशनी व अपने साथ टॉर्च की रोशनी में देखा। इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचनाधिकारी ने विवेचना करते हुए कुलपति, गोपीचंद्र, महाराज सिंह, हरिश्चंद्र व लाखन सिंह के विरुद्ध न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया।
मुकदमे के विचारण के दौरान कुलपति सिंह की मृत्यु हो जाने की वजह से उसके विरुद्ध कार्रवाई उपशमित की गई। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या दो त्रिलोकपाल सिंह के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत अभियुक्त गोपीचंद्र, महाराज सिंह, हरिश्चंद्र को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इस मामले में एक आरोपी लाखन सिंह को दोषमुक्त कर दिया है। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी शिवेंद्र सिंह चौहान ने की।