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दवा का दुकान का लाइसेंस बनाने के लिए ली तीस हजार की घूस

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले में तैनात रहे एक ड्रग इंस्पेक्टर मनु शंकर अग्रवाल द्वारा दवा की दुकान का लाइसेंस बनाने के नाम पर 30 हजार रुपये की घूस लेने का मामला सामने आया है। उनके खिलाफ कोतवाली हाथरस गेट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन की झांसी इकाई के प्रभारी निरीक्षक ने एफआईआर दर्ज कराई है।
वर्ष 2013 में जिले में ड्रग इंस्पेक्टर के पद पर तैनात रहे मनु शंकर अग्रवाल वर्तमान में शामली में डीआई के पद पर तैनात रहे हैं। हाथरस में अपने कार्यकाल के दौरान एक दवा की दुकान का लाइसेंस जारी करने के लिए मनु शंकर अग्रवाल पर 30 हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। इसे लेकर तत्कालीन डीआई अग्रवाल के खिलाफ धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 यथा संशोधित अधिनियम 2018 के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है।
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भ्रष्टाचार निवारण संगठन झांसी इकाई के प्रभारी निरीक्षक सुरेंद्र सिंह द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया कि तत्कालीन डीआई अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित आरोपों की जांच झांसी इकाई द्वारा की गई, जिसमें पाया गया कि अग्रवाल वर्ष 2008 से दिसंबर 2013 तक जिले में तैनात रहे। आरोप है कि नियुक्ति अवधि में योगेश कुमार पुत्र विशंभर दयाल शर्मा निवासी बस्तोई हसायन मैसर्स आकाश मेडिकल स्टोर्स के नाम से दवा की दुकान का लाइसेंस बनवाने लिए 22 फरवरी 2013 को प्रार्थना पत्र लेकर डीआई दफ्तर पहुंचा। जहां पर मौजूद डीआई अग्रवाल द्वारा 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई। रुपये देने में असमर्थता व्यक्त करने पर लाइसेंस नहीं बनने की बात कह दी गई।
इस संबंध में योगेश कुमार द्वारा डीएम से शिकायत करने पर 27 फरवरी 2013 को डीआई ने चालान को पास कर दिया और फिर 28 फरवरी 2013 को निर्धारित फीस जमा की गई। आरोप है कि तत्कालीन डीआई ने योगेश पर डीएम से की गई शिकायत को वापस करने का दबाव बनाया। इसके बाद लाइसेंस जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। तीन जून 2013 को योगेश लाइसेंस लेने के लिए डीआई ऑफिस पहुंचा। यहां पर 30 हजार रुपये बतौर रिश्वत डीआई अग्रवाल द्वारा मांगे जाने का आरोप है। यहां पर योगेश ने 30 हजार रुपये मजबूरन डीआई को देकर अपना लाइसेंस प्राप्त किया और डीएम से की गई शिकायत भी वापस लेनी पड़ी। भ्रष्टाचार निवारण संगठन झांसी के प्रभारी निरीक्षक सुरेंद्र सिंह द्वारा की गई जांच में तत्कालीन डीआई द्वारा रिश्वत लेने का अपराध किया जाना प्रथम दृष्टया पाया गया है।
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तत्कालीन ड्रग इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा भ्रष्टाचार निवारण संगठन झांसी इकाई के प्रभारी निरीक्षक द्वारा दर्ज कराया गया है। ड्रग इंस्पेक्टर पर दवा की दुकान का लाइसेंस बनाए जाने के नाम पर 30 हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है।
-जितेंद्र सिंह दीखित, एसएचओ कोतवाली हाथरस गेट।
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