संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
क्षेत्र के गांव बरामई में मंगलवार को भारी भीड़ के बीच नम आंखों से पैरा कमांडो को अंतिम विदाई दी गई। लद्दाख में हुए पैराशूट हादसे में कमांडो की जान चली गई थी। जवान को अंतिम विदाई देने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा राजनेता भी उनके पैतृक गांव पहुंचे।
गांव बरामई निवासी सुग्रीव सिंह के बेटे हरवीर सिंह वर्ष 2002 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनकी बहादुरी और निपुणता को देखते हुए वर्ष 2013 में उन्हें पैरा कमांडो के लिए चयनित किया गया। तब से अब तक हरवीर सिंह पैरा कमांडो के रूप में भारतीय सेना में सेवा दे रहे थे। उनकी तैनाती इन-दिनों आगरा में थी।
आठ दिन पहले ही उन्हें लद्दाख बुलाया गया था। अंतिम बार जब हरवीर सिंह गांव आए थे तो छोटे भाई हेमंत से मकान बनवाने सहित अन्य जरूरी बातें की थीं। एलएसी पर चल रहे युद्धाभ्यास के बारे में भी चर्चा की थी। हरवीर सिंह अपने अधीनस्थ जवानों को सैन्य अभ्यास करा रहे थे।
इस दौरान दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में पैराशूट न खुलने से उनकी जान चली गई। इस घटना ने परिजनों को तोड़ कर रख दिया। परिवार में हाहाकार मचा हुआ है और गांव में भी मातमी सन्नाटा छा गया। मंगलवार को कमांडो का शव गांव बरामई पहुंचा। सैकड़ों की भीड़ के बीच जवान को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। भीड़ में हर किसी की आंख नम थी।
पत्नी, बेटा, मां सहित अन्य परिजनों की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। कमांडो को अंतिम विदाई देने के लिए कमांडो टीम, जवानों की टुकड़ी, एसडीएम शिव सिंह, सीओ ब्रह्म सिंह, प्रभारी निरीक्षक आशीष कुमार सिंह, विधायक गुड्डू चौधरी, जिला पंचायत सदस्य केशव सिंह व सुआ पहलवान, पूर्व विधायक प्रताप चौधरी, आचार्य महेंद्र सिंह, दीपू चौधरी, चौधरी रामसहाय, प्रधान महाराज सिंह, धर्मेंद्र सिंह, पवन कुमार, धर्मपाल सिंह सहित सैकड़ों लोग पहुंचे।