न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सनातन धर्म में श्रावणी (उपाकर्म) विशेष स्थान है। इसमें विप्र बंधु देव ऋषि श्राद्ध, देव ऋषि तर्पण व नूतन यज्ञोपवीत धारण करते हैं। यह विचार नगर के विद्वान ज्योतिषाचार्य उपेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने मंगलवार को श्रावणी के दौरान मंदिर ठा. श्री मथुरानाथ जी महाराज, मोहल्ला देहली वाला हाथरस में व्यक्त किए। आचार्य उपेंद्र नाथ के सानिध्य में सामवेदीय ब्राह्मणों का श्रावणी (उपाकर्म) पर्व कराया गया।
मौके पर पर्व में पंचगव्य पान, दशविधस्नान, हेमाद्रि, ऋषि श्राद्ध, ऋषि पूजन, देव ऋषि तर्पण एवं नूतन यज्ञोपवीत पूजन कराया गया। भागवताचार्य गोपेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि श्रावणी एक वैदिक कर्म है। इसे ज्ञान और साधना का पर्व माना गया है।
इस पर्व पर आचार्य गोपेश्वर चतुर्वेदी, सोमेश चतुर्वेदी, प्रवीण चतुर्वेदी, श्रीकांत चतुर्वेदी, कृष्णकांत चतुर्वेदी, राहुल, अनमोल, अनुराग, पुलकित, कपिल शर्मा, नरेश वार्ष्णेय, संजीव शर्मा, घनश्याम सारस्वत, राघव, अरुण, कैलाश मुसद्दी आदि थे। संवाद