मेला श्रीदाऊजी महाराज के 112 वां आयोजन पिछले वर्षों की अपेक्षा काफी फीका दिख रहा है। इस साल के मेला में पहले जैसी रंगत दिखाई नहीं दे रही। मेला शुभारंभ के पूर्व से ही सरकारी अधिकारियों के कम दिलचस्पी लेने का असर आयोजन पर साफ दिख रहा है। अपेक्षाकृत काफी कम भीड़ के कारण दुकानदार भी परेशान हैं।
मेला श्री दाऊजी महाराज में इस साल दुकानों की संख्या काफी कम दिख रही है। कई जगह ऐसी हैं, जहां हर साल दुकानें लगाई जाती थीं, लेकिन इस साल इन जगहों पर खाली टेंट लोगों के आराम के लिए बनाए गए हैं। इस साल कोई नया झूला या खेल तमाशा भी दिखाई नहीं दे रहा। बात अगर मेला में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की करें तो उनके आयोजक भी भीड़ को रिझा नहीं पा रहे।
कई बड़े कार्यक्रमों में किसी बड़ी हस्ती का आगमन न होने से भी मेला में भीड़ की कमी है। कुछ एक कार्यक्रमों की स्थिति तो इस साल काफी खराब हुई है। मेला में भीड़ की कमी के कारण दुकानदारों को भी इस साल दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिक्री पिछले सालों की अपेक्षा काफी कम है, जिससे दुकानदारों के चेहरे की रंगत उड़ी हुई है। उनकी असल चिंता यह है कि इन हालात में वह ठेकेदार का किराया कैसे चुका पाएंगे।
नहीं लगी स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी
दाऊजी मेले में हर साल सरकारी योजनाओं की प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता था। इस साल यह प्रदर्शनी बमुश्किल एक स्टॉल तक सिमटकर रह गई है। वहीं दूसरी ओर इस साल मेला में स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन दिए जाने के लिए स्टॉल का आयोजन होना था, जो कि अभी तक दिखाई नहीं दिया है। ओडीओपी के अंतर्गत हाथरस में हींग उद्योग व रेडीमेड गारमेंट्स शामिल हैं। इसके साथ ही कई प्रकार के खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उत्पाद भी जिले में बनते हैं।
आयोजनों के प्रचार-प्रसार का अभाव
मेला में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का संयोजकों आदि के द्वारा जोरदार तरीके से प्रचार प्रसार हर साल किया जाता था। शहर के बाजारों में कई होर्डिंग भी लगाए जाते थे। कार्यक्रम में आने वाले कलाकारों के फोटो के साथ लोगों को जानकारी दी जाती थी, लेकिन इस साल ऐसा कुछ नहीं है। न तो भीड़ जुटाने वाले कलाकार कार्यक्रमों में आए और न ही कार्यक्रमों का प्रचार प्रसार किया जा रहा।
हर साल मेला में आकर हम खाने पीने के सामान की दुकान लगाते हैं। इस साल वाकई भीड़ काफी कम है। मेला में वो रंगत दिखाई नहीं दे रही, जो कि हर साल दिखाई देती थी। दंगल व बड़े कार्यक्रमों के दिन अच्छी भीड़ होती थी, पर इस साल नहीं है। -संजय कुमार, आइसक्रीम विक्रेता
दाऊजी मेले में लंबे समय से दुकान लगा रहे हैं। इस साल भीड़ भी कम है और लोग खरीदारी भी कम कर रहे हैं। उस हिसाब से खरीदारी नहीं हो रही, जैसी उम्मीद थी, जबकि महंगाई पिछले साल की अपेक्षा अधिक नहीं है। -नायाब खां, खिलौना विक्रेता