दि सिविल बार एसोसिएशन की ओर से तहसील प्रशासन को एक पत्र जारी कर चेताया गया है कि शनिवार तक उनकी मांगों को नहीं माना गया तो सोमवार से वह धरना-प्रदर्शन शुरू कर देंगे। तहसील के अधिवक्ता 20 दिन से न्यायालयों का बहिष्कार कर रहे हैं।
सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ठाकुर अमर सिंह व महामंत्री संजय शर्मा का आरोप है कि खैर तहसील में भ्रष्टाचार व्याप्त है। वादों को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। उप जिलाधिकारी को बताया जा चुका है कि नियम विरुद्ध लेखपाल पत्रावलियां अपने पास रखते हैं। गांव घरबरा, लालपुर, रैयतपुर, शेरपुर गिरधरपुर आदि में चकबंदी के दौरान जारी अधिकतर आदेश 15 वर्ष बाद भी खतौनी में दर्ज नहीं किए गए हैं।
तहसीलदार न्यायालय में दाखिल-खारिज आवेदनों को दो-दो माह तक पंजीकृत नहीं किया जा रहा है। दाखिल-खारिज के लिए 90 से 95 दिन की तिथि नियत की जाती है। 90-95 दिन बाद किसी कारण अधिकारी अथवा पेशकार से अधिवक्ता नहीं मिल पाते हैं तो दाखिल-खारिज की पत्रावलियां साक्ष्य के अभाव में निरस्त कर दी जाती हैं।
लेखपालों ने बिना विधिक प्रक्रिया के रियल टाइम खतौनी में करीब 80-85 प्रतिशत काश्तकारों का अंश गलत दर्ज कर दिया है। मौजूदा तहसीलदार ने अंश निर्धारण की प्रक्रिया को अत्यंत जटिल एवं कानूनी परिस्थितियों में उलझा दिया है। इससे काश्तकार तहसील में भटक रहे हैं।
सिविल बार एसोसिएशन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर तहसील प्रशासन को चेताया कि अधिवक्ताओं की ओर से सुधार के लिए दिया गया समय शनिवार को समाप्त हो रहा है। इसके बावजूद तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार और लंबित वादों को नहीं निपटाया गया तो न्यायालयों के बहिष्कार के साथ ही अधिवक्ता धरना-प्रदर्शन शुरू कर देंगे।