हाथरस। हाथरस में जमीन-जायदाद की शक्ल में अपनों पर प्यार लुटाने वालों की कमी नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में लोगों ने जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त ही नहीं की, बल्कि 3839 लोगों ने दान पत्र के जरिये अपनी संपत्ति अपनों के नाम की। सरकार ने भी इस ''प्यार'' पर टैक्स का बोझ नहीं डाला और लोगों को 14 करोड़ 69 लाख रुपये से ज्यादा की छूट प्रदान की।
जैसे-जैसे बीता वित्तीय वर्ष खत्म होने की ओर बढ़ा, रजिस्ट्री दफ्तरों में हलचल और बढ़ी रही। अकेले मार्च के महीने में ही विभाग ने 13.18 करोड़ रुपये का राजस्व बटोरा है। अधिकारियों का कहना है कि लोग समय रहते अपनी रजिस्ट्री पूरी करने के लिए जागरूक दिख रहे हैं।
हाथरस में न केवल सरकारी खजाना भरा जा रहा है, बल्कि दान पत्र पर मिलने वाली छूट ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। इससे परिवारों के बीच संपत्ति के विवाद कम होंगे और कानूनी रूप से मालिकाना हक आसानी से मिल सकेगा। संवाद
सादाबाद ने लक्ष्य हासिल करने में मारी बाजी
राजस्व जुटाने के मामले में जिले की चारों तहसीलों के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। इसमें सादाबाद तहसील अव्वल रही है। सादाबाद ने अपने वार्षिक लक्ष्य का रिकॉर्ड 93 फीसदी हिस्सा हासिल कर लिया है। हाथरस सदर तहसील 91.89 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर
182 करोड़ हुए जमा, पिछले साल से 11.01 फीसदी ज्यादा
हाथरस के लोगों ने इस साल रजिस्ट्री कराने में खूब दिलचस्पी दिखाई। पूरे जिले में अब तक 18,232.17 लाख (करीब 182 करोड़ रुपये) का राजस्व सरकारी खजाने में जमा हो चुका है। पिछले साल के मुकाबले इस बार 11.01 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा गवाही दे रहा है कि जिले में जमीन-जायदाद की कीमतों और मांग में उछाल आया है।
लोगों ने दान पत्र के जरिये जमीनों का बंटवारे कर दस्तावेजीकरण कराया है। इस योजना का लोगों ने भरपूर लाभ लिया है। वार्षिक राजस्व के लक्ष्य के करीब जिले में जमीनों की खरीद-फरोख्त होना बड़ी उपलब्धि है।
संदेश चौधरी, प्रभारी एआईजी स्टांप।