ब्रज की द्वार देहरी कहे जाने वाले हाथरस नगर की मिट्टी साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में काफी उर्वरा रही है। इसमें काका हाथरसी द्वारा स्थापित संगीत कार्यालय भी संगीत क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। देश ही नहीं अपितु विदेशों में संचालित संगीत विद्यालयों, महाविद्यालयों और विवि में भी यहां के संगीत कार्यालय के किताबें अपनी छाप बनाए हुए हैं। आज भी इन शिक्षा संस्थानों में यहां से संगीत की किताबें भेजी जाती हैं।
शहर की जैन गली मोहल्ला अग्रवाल परिवार में 18 सितंबर 1906 को जन्मे काका हाथरसी ने हिंदी हास्य कवि के रूप में तो अपनी ख्याति अर्जित की ही, साथ ही अपनी प्रतिभा से विश्व में हिंदी के साथ साथ संगीत की भी पताका फहराई। उन्होंने अपनी प्रतिभा से हाथरस का नाम विश्व पटल पर रोशन किया। काका कवि, संगीतकार, चित्रकार, फिल्मकार, समाज सुधारक, युग दृष्टा, योग शास्त्री होने के साथ साहित्य संगीत तथा कला की अनेक विधाओं से परिपूर्ण थे। हिंदी हास्य व्यंग काव्य और संगीत की इन विशिष्ट उपलब्धियों से प्रभावित होकर भारत सरकार ने1985 में उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया।
काका हाथरसी का हिंदी व्यंग्य की कविताओं का सफर 89 वर्ष की आयु में 18 सितंबर 1995 को पूर्ण हुआ और वे प्रभु में विलीन हो गए। विरला संयोग ही है कि काका जन्म दिवस ही उनका अवसान दिवस बना। वर्ष 1962 में उन्होंने संगीत की उन्नति के लिए गर्ग एंड कंपनी बनाई, जो संगीत कार्यालय के नाम से आज भी स्थापित है।इस संगीत कार्यालय की महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संगीत के क्षेत्र में शोध कार्य करने वाले शोधार्थियों के लिए इस कार्यालय से प्रकाशित किताबें के अध्ययन की अनिवार्यता बनी हुई हैं। इस संगीत कार्यालय की किताबें देश ही नहीं अपितु विदेशों में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। संगीत कार्यालय के केयर टेकर शरण गोपाल ने बतायाकि कई विवि में आज भी यहां से तमाम पुस्तकें भेजी जाती हैं।
इन शैक्षणिक संस्थाओं में जाती हैं पुस्तकें
जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी जोधपुर, बसंत कॉलेज फॉर वोमेन वाराणसी, देव समाज कॉलेज फॉर वोमेन चंढ़ीगढ़, आर्य गर्ल्स कॉलेज अंबाला, देशमुख गर्ल्स कॉलेज होशियापुर, कन्या महाविद्यालय जालंधर, नवल किशोर भारती पालिका कन्या महाविद्यालय चंदौसी मुरादाबाद, कालिंदी कॉलेज नई दिल्ली, इंद्रा गांधी महिला महाविद्यलाय कैथल हरियाणा, पीजी कॉलेज गाजीपुर, जैन कन्या पाठशाला पीजी कॉलेज मुजफफरनगर आदि में पुस्तकें भेजी जाती हैं।
यह है प्रसिद्ध संगीत पुस्तकें
आवाज़ सुरीली कैसे करें-उपाय व चिकित्सा, पाश्चात्य संगीत शिक्षा सचित्र शिक्षा, ब्रज के देवालयों में संगीत परम्परा संगीत पॉप म्यूज़िक अंक, लेख तथा स्वरबद्ध गीत, सहस्राब्दी संगीत अंक-विशिष्ट सामग्री, उपशास्त्रीय संगीत अंक लेख मंदिरों, वैदिक संगीत अंक-शोधपूर्ण लेख, सुरैया संगीत अंक जीवनी व स्वरबद्ध गीत, संगीत हृदयनारायणदेव अंक-शोपूर्ण सामग्री, संगीत अमृत महोत्सव अंक, मुसलमान और भारतीय संगीत अंक।