पीहुरा के कचरा निस्तारण केंद्र में लगा गोबर का ढेर
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केस-1
पीहुरा में गोबर व घास से घिरा आरसीसी
ग्राम पंचायत पीहुरा के एकीकृत ठोस कचरा प्रबंधन केंद्र के बाहर चारों ओर लंबी-लंबी घास उगी है। मुख्य द्वार पर ही गोबर व गंदगी पड़ी हुई है। अंदर के हालात गवाही दे रहे हैं कि यह केंद्र महीनों से खुला ही नहीं है। यहां तक पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ता तक नहीं है।
केस-2
ममौता कलां में केंद्र पर लटका ताला
सासनी क्षेत्र की ग्राम पंचायत ममौता कलां के ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के बाद से कचरा निस्तारण केंद्र चालू ही नहीं हुआ है और इस पर हमेशा ताला लटका रहता है। दरवाजे पर और अंदर घास उग चुकी है। कचरा पृथक्करण के लिए बनीं हौदियां पूरी तरह खाली पड़ी हैं।
केस-3
मीरपुर में केंद्र के अंदर ही गंदगी का ढेर
सादाबाद के गांव मीरपुर में लाखों की लागत से तैयार केंद्र के परिसर के अंदर ही साफ-सफाई न होने से गंदगी का ढेर लगा हुआ है। चारों तरफ लंबी-लंबी घास उगी है। नियमित संचालन न होने से ग्रामीण जगह-जगह कचरा फेंकने के लिए मजबूर हैं।
केस-4
लढ़ौता में जर्जर हुआ भवन
सासनी के गांव लढौता में जब से कचरा निस्तारण केंद्र का निर्माण हुआ है, तब से इसका कोई उपयोग नहीं हुआ। देखरेख के अभाव में अब इसकी लाखों की लागत से बनी बिल्डिंग खंडहर हो रही है, लेकिन विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
एक नजर में आंकड़े
- जिले में कुल ग्राम पंचायतें- 462
- बनाए गए कुल कचरा निस्तारण केंद्र- 445
- प्रति केंद्र निर्माण की औसत लागत- लगभग नौ लाख रुपये
- प्रोजेक्ट पर खर्च हुआ कुल बजट - लगभग 40.05 करोड़ रुपये
- कागजों/फाइलों में दर्ज चालू केंद्रों की संख्या- 316
- हकीकत में चालू केंद्रों की संख्या बमुश्किल - 15 से 20