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हाथरस: कमरे में बंद कर किशोरी से दुष्कर्म में बाल अपचारी को 20 साल कैद, तीन को बंधक बनाने व धमकाने में सजा

Sun, 06 Sep 2026 10:46 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

कोचिंग जाने के दौरान सहपाठी यशिता किशोरी को बहला-फुसला कर खाली पड़े मकान में ले गई। वहां पहले से आरोपी सचिन, अशोक व बाल अपचारी ने पीड़िता को कमरे में बंद कर दिया। आरोप के अनुसार, बाल अपचारी ने जान से मारने की धमकी देकर किशोरी से दुष्कर्म किया और शाम तक कमरे में बंद रखा।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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हाथरस न्यायालय विशेष न्यायाधीश निर्भय नारायण राय (पॉक्सो-प्रथम) ने सिकंदराराऊ के पांच साल पुराने मामले में चार अभियुक्तों को दोष सिद्ध किया है। इनमें मुख्य अभियुक्त बाल अपचारी को 20 साल के कठोर कारावास व अन्य तीन आरोपियों को बंधक बनाने व धमकाने पर एक साल की सजा सुनाई है।

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मामला सिकंदराराऊ कस्बे का ही है। एफआईआर के अनुसार 19 मार्च 2021 की दोपहर कोचिंग जाने के दौरान सहपाठी यशिता किशोरी को बहला-फुसला कर अशोक के खाली पड़े मकान में ले गई। वहां पहले से आरोपी सचिन, अशोक व बाल अपचारी ने पीड़िता को कमरे में बंद कर दिया।

आरोप के अनुसार, बाल अपचारी ने जान से मारने की धमकी देकर किशोरी से दुष्कर्म किया और शाम तक कमरे में बंद रखा। घर पहुंचकर पीड़िता ने परिजनों को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद पीड़िता की मां ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला ट्रायल पर सैशन न्यायालय पहुंचा। यहां अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता, उसकी मां, प्रधानाचार्य और चिकित्सक सहित कुल आठ गवाह पेश किए गए। सबूत व गवाहों के आधार पर कोर्ट ने इन्हें दोषी सिद्ध किया।
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अदालत ने बाल अपचारी (उम्र 16 वर्ष से अधिक) को भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 342, 506 एवं पोक्सो एक्ट की धारा 3/4(2) के तहत दोषी माना है। पोक्सो एक्ट में 20 साल के कठोर कारावास व 12 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वारदात में सहयोग करने वाले आरोपी सचिन कुमार, अशोक कुमार और सहपाठी किशोरी यशिता को छह महीने कैद व एक हजार रुपये अर्थदंड तथा 506 (आपराधिक धमकी) में एक साल की कैद व 15 सौ रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

अदालत की टिप्पणियां

  • पीड़िता का बयान सर्वोपरि: कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का बयान विश्वसनीय और सुसंगत है। यौन अपराधों के मामलों में पीड़िता का बयान ही सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है।
  • पॉक्सो एक्ट की उपधारणा (धारा 29 व 30): अदालत ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो मामलों में अभियुक्त को अपनी निर्दोषिता का भार स्वयं सिद्ध करना होता है, जिसमें बचाव पक्ष नाकाम रहा।
  • उम्र सत्यापन: स्कूल रजिस्टर और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर घटना के समय पीड़िता की उम्र 14 वर्ष 4 माह साबित हुई।
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