वर्ष 2003 में 30 गांवों को नगर पालिका हाथरस में शामिल किया गया। तब से यहां सड़क, बिजली, पथप्रकाश, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी विस्तार नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि बस शहरी सरकार चुनने यानी नगर पालिका चुनाव में वोट डालने तक ही उनकी भूमिका रही है। सीमा विस्तार के बाद पालिका प्रशासन की उपेक्षा का दंश यहां के ग्रामीण झेल रहे हैं।
तीन साल पहले 11 ग्राम पंचायतों के 30 गांवों को हाथरस नगर पालिका परिषद में शामिल किया गया। लोगों को उम्मीद जगी कि जिला मुख्यालय का हिस्सा बनने के बाद विकास होगा, शहरी सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन तीन साल बीत गए और विकास तो दूर, विकास कार्य कराने के लिए सर्वे तक नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि इससे तो हम गांव में ही बेहतर थे। ग्राम प्रधान तक सीधे पकड़ थी। अब सभासद भी केवल प्रस्ताव रखने तक ही सीमित है। मंजूरी बोर्ड की सहमति पर टिकी है।
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वर्ष 2003 में 30 गांवों को नगर पालिका हाथरस में शामिल किया गया। तब से यहां सड़क, बिजली, पथप्रकाश, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी विस्तार नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि बस शहरी सरकार चुनने यानी नगर पालिका चुनाव में वोट डालने तक ही उनकी भूमिका रही है।
सीमा विस्तार के बाद पालिका प्रशासन की उपेक्षा का दंश यहां के ग्रामीण झेल रहे हैं। पालिका के विभिन्न विभागों ने इन गांवों में कराए जाने वाले कार्यों का सर्वे तक नहीं कराया है। सभासदों से मिलने वाले प्रस्तावों पर ही काम कराने का हवाला दे रहे हैं। भगवंतपुर में जल निकासी की व्यवस्था लचर है। नहरोई में जाने वाले रास्ते की स्थिति बहुत खराब है, इस कारण यहां अक्सर जलभराव की स्थिति बनी रहती है। गांव तरफरा में तमाम सड़कें जर्जर अवस्था में हैं। गांवों को शहर से जोड़ने वाले रास्ते भी जर्जर हैं।
शहर में शामिल होने वाले गांवों का विकास कार्य के लिए सर्वे कराया जा रहा है। नए टीएस आए हैं, जल्द ही सर्वे को पूरा कराया जाएगा। -नवनीत शंखवार, ईओ, नगर पालिका परिषद, हाथरस
शहरी मतदाता तो बन गए, लेकिन सुविधाओं के नाम पर आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं। -अमित पौरुष, जोगिया
गांव की गलियों में अधेंरा हैं, अभी तक पथप्रकाश की व्यवस्था नहीं हुई, आज भी पहले की तरह गांव के बाशिंदे होने का अहसास होता है। -गोपी पंडित, गिजरौली
उस समय, शहर की सीमा में आने की खुशी हुई, लेकिन तीन साल बाद शहरी सुविधाएं क्या होती हैं, यह आज तक पता भी नहीं चला। -योगेश शर्मा, नंद नगरिया
गांव की सुविधा खत्म हुई, शहर से मिली नहीं
नगर पालिका परिषद के सीमा विस्तार में 11 ग्राम पंचायतों के 30 गांवों के शामिल होने के बाद वहां पर ग्राम पंचायत स्तर से मिलने वाली सुविधाएं बंद हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सुविधा तो बंद हो गई और शहर की सुविधाएं मिल नहीं पा रही है। इससे तो गांव में ही रहते तो बेहतर थे, कम से कम ग्रामीण सुविधाएं मिलती तो रहतीं।