प्रीपेड स्मार्ट मीटर के लिए पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने के बाद पहला ही महीना असमंजस से घिर गया है। शासन स्तर से बिल जनरेट करने की तिथि सात जून निर्धारित थी, लेकिन रविवार और सोमवार को भी अधिकांश उपभोक्ताओं के मोबाइल एप पर बिल प्रदर्शित नहीं हुए। जिससे जिले के लगभग 1.45 लाख उपभोक्ता परेशान हैं।
परेशानी का सबब यह भी है कि देरी की वजह से कहीं उन्हें बढ़ा हुआ बिल न थमा दिया जाए। रविवार का अवकाश होने के कारण बिजली विभाग के सभी काउंटर बंद रहे। इसलिए इसका कोई समाधान नहीं हो सका। लोग सोशल मीडिया पर बिजली बिल आने की जानकारी लेते दिखाई दिए।
दरअसल, स्मार्ट मीटर व्यवस्था ऑनलाइन और मोबाइल एप पर निर्भर है। ऐसे में यदि मुख्य सर्वर या तकनीकी कारणों से बिल जनरेट होने में देरी होती है, तो उपभोक्ताओं के पास जानकारी जुटाने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। रविवार को ऑनलाइन पोर्टल अपडेट न होने से परेशानी हुई। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता अजीत कुमार सिंह ने बताया कि तकनीकी प्रक्रिया के कारण कुछ समय लग रहा है। जल्द ही बिलों से जुड़ी दिक्कतों को दूर कर स्थिति साफ कर दी जागी।
जुड़कर आएगी सिक्योरिटी राशि
स्मार्ट मीटर लगने के बाद पहली बार जारी हो रहे पोस्टपेड बिल में करीब 25 प्रतिशत सिक्योरिटी की धनराशि जोड़ी जाएगी। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह वह धनराशि है, जो कनेक्शन प्रीपेड करते समय समायोजित की गई थी। अब इसे चार किस्तों में बिल में जोड़कर वसूला जाएगा। कमर्शियल कनेक्शनों के लिए यह वसूली 40:30:30 के अनुपात में यानी तीन महीनों के भीतर की जाएगी।
अब तक 33 हजार बिल बने
विभागीय अधिकारियों की मानें तो अभी तक 33 हजार बिल बने हैं। बिल जनरेट होने में क्या दिक्कत आ रही है, इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि सभी बिल लखनऊ से जनरेट किये जा रहे हैं।
तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण कुछ समय लग रहा है। किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। उपभोक्ताओं को परेशान होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, जल्द ही बिलों से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को दूर कर स्थिति साफ कर दी जाएगी।
-अजीत कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता।