बदलते मौसम में सबसे ज्यादा मार जोड़ों के दर्द (संधिवात) और सूजन (आमवात) से पीड़ित मरीजों पर पड़ रही है। एलोपैथिक दवाओं के साइड इफेक्ट्स से बचकर स्थायी आराम पाने के लिए लोग आयुर्वेद की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि हाथरस के स्थानीय राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय की ओपीडी में इजाफा हुआ है। पहले जहां 30 से 40 मरीज पहुंचते थे, वहीं यह अनुपात बढ़कर 50 से 60 पहुुंच चुका है। शुक्रवार को 53 मरीज परामर्श के लिए पहुंचे, जिनमें से 17 मरीज संधिवात व आमवात से संबंधित रहे।
आयुर्वेद चिकित्सालय के प्रभारी डाॅ. सुनील कुमार ने बताया कि मौसम में ठंडक या नमी बढ़ने के कारण शरीर में वात दोष असंतुलित हो जाता है। इस कारण बुजुर्गों के साथ-साथ अब युवा भी जोड़ों में तेज दर्द, जकड़न और सूजन की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सालय के ओपीडी काउंटर पर सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या घुटने, कमर और कंधों के दर्द से परेशान मरीजों की है।
चिकित्सालय में इलाज कराने आए चंदपा के राजवीर सिंह (70) ने बताया कि लंबे समय से दर्द वाली गोलियां खाने से पेट में जलन होने लगी थी, लेकिन जब से राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय से दवा और तेल मिला है, दर्द में बहुत आराम है और कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है।
इन अचूक औषधियों से मिल रहा आराम
- क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं युनानी अधिकारी डॉ. नरेंद्र ने बताया कि आयुर्वेद में संधिवात और आमवात का जड़ से इलाज संभव है। अस्पताल में आ रहे मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार औषधियां और उपचार दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक दवाएं न सिर्फ दर्द से राहत देती हैं, बल्कि जोड़ों को भीतर से पोषण भी प्रदान करती हैं।
- योगराज गुग्गुल व सिंहनाद गुग्गुलु : यह जोड़ों की सूजन को कम करने और वायु दोष को शांत करने में बेहद असरदार साबित हो रही हैं।
- महानारायण तेल व प्रसारिणी तेल : मरीजों को प्रभावित जोड़ों पर इस विशेष तेल से हल्के हाथों से मालिश (अभ्यंग) करने की सलाह दी जा रही है, जिससे जकड़न दूर होती है।
- त्रिफला और पंचकोल चूर्ण : शरीर से हानिकारक टॉक्सिंस (आम रस) को बाहर निकालने और पाचन क्रिया को दुरुस्त करने के लिए यह दवाएं दी जा रही हैं।