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जगन्नाथ रथ यात्रा में विदेशी श्रद्धालु भी शामिल

Sun, 06 Nov 2016 11:45 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
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रथ के आगे सफाई करते डीएम। - फोटो : अमर उजाला
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बृज वसुंधरा के परम पूज्य संत पं. गया प्रसाद जी महाराज की 124वीं जयंती महोत्सव पर सुबह से देर शाम तक भक्ति कार्यक्रमाें की धूम रही। 
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जयंती पर शहर में पहली बार वृंदावन के इस्कॉन मंदिर के संकीर्तनकारों द्वारा निकाली गई जगन्नाथ रथयात्रा में संकीर्तन मंडल में देश-विदेश के श्रद्धालु भी शामिल हुए और भजनों पर नृत्य किया। डीएम और एसपी भी रथयात्रा में शामिल हुए।

शहर भर में रथयात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। संत गया प्रसाद महाराज की जयंती पर मेंडू गेट स्थित गोपाल धाम पर सुबह गिरिराज जी महाराज का पूजा-अर्चना के साथ अभिषेक हुआ। गोपाल धाम से भव्य रथ में भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और बहन सुभद्रा जी के स्वरूपों को भव्य रथ में विराजमान किया गया।
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डीएम अविनाशकृष्ण सिंह और एसपी केशव चौधरी ने संयुक्त रूप से आरती उतारी और पूजा-अर्चना की। रथयात्रा में देश-विदेश के साधु संत और भक्त भी शामिल हुए। संकीर्तन मंडल के बीच विदेशी संतों ने भी नृत्य किया। शहर भ्रमण के दौरान जगह-जगह आरती उतारकर और पुष्प वर्षा कर स्वागत हुआ।

रथयात्रा मेंडू गेट से शुरू होकर चकी बाजार, जामा मस्जिद चौराहा, चामड़ गेट, सब्जी मंडी, नयागंज, मोती बाजार, घंटाघर, हलवाई खाना, गुड़िहाई बाजार, सरक्यूलर रोड होते हुए दोबारा मेंडू रोड पहुंच कर समाप्त हुई।

चेयरमैन डौली माहौर, प्रतिनिधि वासुदेव माहौर, बसपा नेता आशीष शर्मा, युवा नेता रवि चौहान सहित प्रमुख लोगों का रथयात्रा में शामिल होने पर स्वागत किया गया। इस मौके पर पं. भोलेशंकर शर्मा, दाऊदयाल वार्ष्णेय, आशीष शर्मा, राजू शर्मा, विजय गोयल, त्रिलोकीनाथ अग्रवाल, श्यामसुंदर गोयल, मदन मोहन अग्रवाल, राकेश वर्मा, अजय अग्रवाल, श्रवण कुमार, डॉ. जितेंद्र कुमार फौजी, सुरेश चंद्र मिश्र आदि मौजूद थे।
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भगवान जगन्नाथ रथयात्रा में वृंदावन के इस्कॉन मंदिर से आया रथ लोगों में आकर्षण का केंद्र बना रहा। यह पहला मौका था, जब संत गयाप्रसाद जी महाराज की जयंती पर भव्य रथयात्रा निकाली गई। जगन्नाथ जी का रथ भी अद्भुत था। मेंडू गेट पर जब रथ खड़ा हुआ था तो लोग यही कह रहे थे कि रथ शहर भर में भ्रमण कैसे कर पाएगा। रथ ऊंचा है और बाजारों में तार काफी नीचे तक लटके हुए हैं। रथयात्रा शुरू हुई, जब बाजार में नीचे तार आए तो आयोजकों ने रथ में हत्था लगाकर उसे नीचे कर दिया। रथ फोल्डिंग था, जिसे हत्था लगाकर नीचा कर दिया गया।
 
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