बिना अनुमति के धन कमाने के लिए एक कमरे में हॉस्टल स्थापित किया गया। इस हॉस्टल में 29 बच्चे रहकर पढ़ाई कर रहे थे। हॉस्टल के नाम पर भी इन सभी के द्वारा बच्चों से अधिक धन वसूला जा रहा था। इस अवैध छात्रावास की देखरेख प्रबंधक के पिता जसोदन सिंह, अध्यापक राम प्रकाश सोलंकी व वीरपाल सिंह व कथित प्रधानाचार्य लक्ष्मण सिंह द्वारा की जा रही थी।
प्रधानाचार्य रूबी राय, अंकपत्रों पर हस्ताक्षर कर रहे थे लक्ष्मण सिंह
पुलिस की विवेचना में सामने आया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी के यहां स्कूल की कक्षा पांच तक के मान्यता के प्रपत्रों में प्रधानाचार्य के रूप में रूबी राय का नाम अंकित है। स्कूल के प्रधानाचार्य के रुप में लक्ष्मण सिंह बच्चों के अंकपत्र व अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहे थे। लक्ष्मण सिंह ने कक्षा छह से नौ तक के अंकपत्रों पर भी हस्ताक्षर किए, जबकि वह जानते थे कि स्कूल केवल पांच तक की ही मान्यता है। अभिभावकों को फीस की रसीदें भी दीं।
यह था मामला
22 सितंबर को कृतार्थ की स्कूल के छात्रावास में हत्या हुई थी। इस मामले में पुलिस ने प्रबंधक दिनेश बघेल, उसके पिता जसोदन सिंह, प्रिंसिपल लक्ष्मण सिंह, अध्यापक वीरपाल, राम प्रकाश सिंह सोलंकी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था इसमें आरोप लगाया गया था कि स्कूल की तरक्की के लिए इन लोगों ने बालक कृतार्थ की बलि दी थी और परिजनों को उसकी तबीयत खराब होने की जानकारी दी। साथ ही शव को चिकित्सक के पास ले जाने की बात कही थी। कतार्थ का शव अगले दिन सुबह सादाबाद में स्कूल प्रबंधक की कार में मिला था। बाद में पुलिस ने खुलासा किया कि कक्षा आठ के छात्र ने स्कूल में छुट्टी कराने के लिए कृतार्थ की हत्या की थी। गत 23 दिसंबर को उसके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया। प्रबंधक सहित पांच पर हत्या के साक्ष्य मिटाने और पुलिस को गुमराह करने का आरोप लगाया था