बेसिक शिक्षा विभाग में ईसीसीई एजुकेटर की भर्ती में गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद जांच में दोषी पाए जाने पर डीएम अतुल वत्स ने सेवा प्रदाता एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश दिए हैं। एजेंसी व दो जिला समन्वयकों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
विभागीय जांच में सेवा प्रदाता फर्म के साथ-साथ जिला समन्वयक ट्रेनिंग वरुण प्रताप और जिला समन्वयक एमआईएस बलवंत मौर्य की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। भर्ती के दौरान रेंडमाइजेशन सूची से छह पात्र अभ्यर्थियों के नाम हटाकर उनकी जगह बाहरी लोगों के नाम शामिल किए गए। फर्म ने रेंडमाइजेशन की सूची में हेरफेर किया।
मुख्य सूची में शामिल छह पात्र अभ्यर्थियों के नामों को हटाकर उनकी जगह बैकडोर से आए अन्य पसंदीदा अभ्यर्थियों के नाम शामिल कर दिए। इस जालसाजी का पता लगने के बावजूद विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई करने के बजाय पत्रावली को दबा दिया। जब मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया तो विभाग की नींद टूटी।
जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन एजुकेटर (ईसीसीई) के 80 पदों पर भर्ती के लिए करीब 1000 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। विभाग ने रेंडमाइजेशन के जरिये 240 आवेदकों को साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन के लिए चुना था। इसके लिए 29 और 30 जून की तिथि निर्धारित थीं, लेकिन विभाग ने न तो अभ्यर्थियों को इसकी कोई सूचना दी और न ही उच्चाधिकारियों को समय पर अवगत कराया था।