डाॅ. मिथुन घोष से जानकारी लेते समस्त न्यायिक अधिकारी। स्रोत : सूचना विभाग
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जनपद न्यायालय में बृहस्पतिवार को न्यायिक अधिकारियों के लिए मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम प्रक्रिया से संबंधित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस मौके पर डॉ. मिथुन घोष ने न्यायिक अधिकारियों को पोस्टमार्टम की बाहरी व आंतरिक जांच की प्रक्रिया के बारे में बताया।
यह कार्यक्रम जेटीआरआई लखनऊ के निर्देशानुसार जनपद न्यायाधीश विनय कुमार तृतीय की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में हुआ।डाॅ. घोष ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट, खरोंच, रंग में बदलाव और मृत्यु के समय का आकलन किया जाता है। ‘वाई’ या ‘आई’ आकार का चीरा लगाकर दिल, फेफड़े, लिवर और दिमाग जैसे अंगों की जांच की जाती है।
जहर की आशंका होने पर अंगों के नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे जाते हैं, जिससे मृत्यु के कारण का वैज्ञानिक आधार पर पता चलता है। इस दौरान अपर जनपद न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव, हर्ष अग्रवाल, निर्भय नारायण राय, शैलेंद्र सिंह, महेंद्र कुमार रावत, प्रशांत कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जयहिंद कुमार सिंह आदि मौजूद थे। संवाद