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Hathras News: स्थानीय फैक्टरियों से बढ़ी आपूर्ति, सरिया के भाव लुढ़के

Sun, 26 Jul 2026 01:53 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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शहर के एक गोदाम में रखा सरिया का स्टॉक। संवाद - फोटो : Samvad
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हाथरस और अलीगढ़ की फैक्टरियों से सरिया की पर्याप्त आपूर्ति के कारण बाजार में इसकी कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इसका सीधा लाभ मकान निर्माण कराने वाले लोगों को मिल रहा है। स्थानीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से झारखंड की अन्य कंपनियों को भी अपने उत्पादों के दाम कम करने पड़े हैं। व्यापारियों के अनुसार, कुछ समय पहले तक स्थानीय सरिया करीब 58 रुपये प्रति किलो बिक रहा था। अब इसके दाम घटकर करीब 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
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शहर के निर्माण सामग्री कारोबारियों ने बताया कि पिछले कुछ सप्ताह में स्थानीय फैक्टरियों से सरिया की आपूर्ति तेज हुई है। सरिया विक्रेता संजय अग्रवाल ने बताया कि ग्राहकों को कम कीमत पर सरिया मिल रही है। कारोबारी राजीव गुप्ता का कहना है कि स्थानीय स्तर पर दाम कम होने से झारखंड की कई कंपनियों को भी अपने दाम घटाने पड़े हैं।
हालांकि, प्रीमियम कंपनियों की सरिया की कीमतें अभी भी 70 रुपये प्रति किलो से अधिक बनी हुई हैं। इससे सामान्य श्रेणी की सरिया खरीदने वाले ग्राहकों को सबसे अधिक फायदा मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी रहने से कीमतों पर दबाव बना है। स्थानीय उत्पादन बढ़ने से भी दाम कम हुए हैं।
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बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान निर्माण कार्यों की रफ्तार कुछ धीमी रहने और स्थानीय उत्पादन बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना है। आने वाले दिनों में मांग सामान्य रहती है तो सरिया के दाम कुछ समय तक इसी स्तर पर बने रह सकते हैं। इससे मकान निर्माण कराने वाले लोगों को खर्च में राहत मिलेगी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी रहती है। स्थानीय उत्पादन में वृद्धि होने से भी कीमतों पर दबाव बना है। हाथरस और अलीगढ़ की फैक्टरियों से लगातार माल आने से बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज हुई है। आने वाले दिनों में मांग सामान्य रहने पर सरिया के दाम इसी स्तर पर बने रह सकते हैं। इससे मकान निर्माण कराने वालों को खर्च में राहत मिलेगी।
11 हजार रुपये तक की बचत का अनुमान
सरिया के दाम घटने से मकान निर्माण की कुल लागत में अच्छी-खासी कमी आ रही है। उदाहरण के तौर पर 100 वर्ग गज (करीब 900 वर्ग फीट) के मकान में छत के लिए लगभग 900 किलो और पिलर व बीम के लिए करीब 500 किलो सरिया की जरूरत होती है। इस प्रकार कुल करीब 1400 किलो सरिया का उपयोग होता है। मौजूदा समय में सरिया के दाम में करीब आठ रुपये प्रति किलो की कमी आने से एक मकान के निर्माण पर लगभग 11 हजार रुपये तक की सीधी बचत होने का अनुमान है।
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निर्माण विशेषज्ञों के अनुसार मकान निर्माण में सरिया सबसे महत्वपूर्ण निर्माण सामग्रियों में शामिल है। एक वर्गफुट निर्माण में औसतन 3.5 से 4.5 किलोग्राम सरिया की खपत होती है। ऐसे में 1000 वर्गफुट के मकान के लिए करीब 3500 से 4500 किलोग्राम सरिया की जरूरत पड़ती है। पहले सरिया 58 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिल रही थी, जबकि अब स्थानीय उत्पादन शुरू होने के बाद इसकी कीमत करीब 50 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। यानी प्रति किलोग्राम 8 रुपये की कमी आई है। इसका सीधा मतलब है कि सिर्फ सरिया पर ही 1000 वर्गफुट के मकान में 28 हजार से 36 हजार रुपये तक की बचत हो सकती है। चूंकि मकान निर्माण में सरिया की लागत कुल निर्माण खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, इसलिए इसकी कीमत घटने से कुल निर्माण लागत भी कम हो जाती है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से परिवहन लागत और समय की भी बचत होती है, जिसका लाभ बिल्डरों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी मिलता है।
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