कभी गर्मी तो कभी ठंडक और सुबह-शाम के तापमान में अंतर के बीच सर्दी, खांसी और श्वसन संबंधी संक्रमण की शिकायतें सामने आ रही हैं। श्वास नली में सूजन होने से ब्रोंकाइटिस का खतरा भी बढ़ जाता है।
जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) तक सर्दी-खांसी और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। फिजिशियन डाॅ. अवधेश कुमार ने बताया कि लगातार खांसी, बलगम, सीने में जकड़न और सांस लेते समय घरघराहट जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ब्रोंकाइटिस में फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली श्वास नलियों में सूजन आ जाती है। इस कारण खांसी की समस्या होती है और कई बार बलगम भी निकलता है। यह समस्या अचानक शुरू होकर कुछ सप्ताह तक रह सकती है।
पहले से पीड़ित लोग बरतें सावधानी
अधिकतर मामलों में एक्यूट ब्रोंकाइटिस का कारण वायरल संक्रमण होता है। सर्दी-जुकाम के बाद भी इसके लक्षण उभर सकते हैं। धूल, धुआं, वायु प्रदूषण और तंबाकू के धुएं के संपर्क में रहने से श्वास नलियों में जलन बढ़ सकती है। पहले से अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
लगातार खांसी व सीने में जकड़न प्रमुख लक्षण
ब्रोंकाइटिस की शुरुआत सामान्य सर्दी-जुकाम और खांसी से हो सकती है। कुछ लोगों में खांसी के साथ बलगम निकलने, गले में खराश, थकान, हल्का बुखार और सीने में असहजता की शिकायत होती है। सांस लेते समय घरघराहट भी महसूस हो सकती है। कई बार संक्रमण ठीक होने के बाद भी खांसी कुछ सप्ताह तक बनी रहती है।
बिना सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचें
सीएमओ डाॅ. वेदप्रकाश ने कहा कि अधिकांश एक्यूट ब्रोंकाइटिस वायरल संक्रमण के कारण होता है, इसलिए हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या खांसी की दवाएं लेना नुकसानदेह हो सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
-अत्यधिक धूल-धुआं और प्रदूषित इलाकों में जाने से बचें।
-खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल या मास्क से ढंकें।
-पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं और शरीर को पूरा आराम दें।
- हाथों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतें।