नगला फतेला को लेकर दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड कटघरे में है। केंद्रीय ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) ने दक्षिणांचल के एमडी से पूछा है कि 30 अक्तूबर 2015 को जब विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया गया था तो कई महीने बीतने के बावजूद अभी तक गांवों में किसी घर को कनेक्शन क्यों नहीं दिया गया।
क्या वजह रही कि गांव में घरों तक लाइन पहुंच गई, लेकिन कई महीने बीतने के बावजूद कनेक्शन नहीं दिए गए और बिजली नहीं पहुंचाई गई। आरईसी ने साफ किया है कि जवाब नहीं दिए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने भी 26 फरवरी 2015 को आरईसी को लिखी चिट्ठी में अपने क्षेत्र के 1,529 गांवों की सूची दी थी, जिनका विद्युतीकरण नहीं हुआ था। इनमें भी नगला फतेला का नाम शामिल था। इसके बाद इस गांव में विद्युतीकरण का काम शुरू हुआ।
अक्तूबर 2015 में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के चीफ इंजीनियर ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा कि नगला फतेला में विद्युतीकरण और उसे ऊर्जीकृत करने का काम पूरा कर लिया है। इस रिपोर्ट के आधार पर गांव को ऊर्जीकृत गांवों की सूची में शामिल कर लिया था और इस आधार पर गांव के ऊर्जीकृत होने की बात का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में किया था।
आरईसी के मुताबिक टेस्टिंग और वेरिफिकेशन का काम भी डीवीवीएनएल ने किया। हालंाकि आरईसी के एजीएम आरके गुप्ता ने 17 अगस्त को लिखी अपनी चिट्ठी में मुख्य अभियंता के बयान को लेकर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें उन्होंने 150 घरों में सालों से बत्ती होने की बात कही थी, जबकि 13 नवंबर 2013 को तैयार डीपीआर में किसी भी घर में बिजली न होने की बात कही गई थी।