हसायन के 11 साल पुराने डकैती व सामूहिक दुष्कर्म के मामले में बृहस्पतिवार को आए न्यायालय के निर्णय ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वादी ने स्पष्ट कहा कि सामूहिक दुष्कर्म की जानकारी देने के बाद भी पुलिस ने तहरीर में उसका जिक्र नहीं करने दिया और उनका अंगूठा लगवा लिया।
चोरी की धारा में रिपोर्ट दर्ज की गई और फिर धारा 379 व 411 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। वादी ने बताया कि उनकी पत्नी, भाभी व पुत्रवधु के साथ बदमाशों ने दुष्कर्म किया था, लेकिन पुलिस ने किसी के बयान दर्ज नहीं किए। मामले में जब पुलिस अधीक्षक से शिकायत की गई तो विवेचना अपराध शाखा भेजी गई।
ढाई महीने बाद पुलिस ने पीड़िताओं के बयान दर्ज किए और करीब तीन महीने के बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज हो सके थे। अपराध शाखा ने प्रकरण में डकैती, दुष्कर्म व एससी-एसटी एक्ट की धाराएं बढ़ाईं और विवेचना सीओ सासनी को स्थानांतरित हुई।
डकैती की धारा बढ़ी, पर मुल्जिम नहीं मिले
हैरानी की बात है कि तीन बार विवेचना होने के बावजूद जाहिद के अलावा कोई और अभियुक्त पुलिस की पकड़ में नहीं आया और न ही पुलिस ने खोजने का प्रयास किया, जबकि अपराध शाखा ने मुकदमे को डकैती की धारा में तरमीम किया था। केवल जाहिद तक चार्जशीट सीमित रही। इन्हीं पहलुओं पर कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए डीजीपी को कॉपी भेजी है।
पीड़िताओं ने कोर्ट को बताई आपबीती
वादी की पत्नी, भाभी व पुत्रवधू के साथ आठ बदमाशों ने घटना को अंजाम दिया था। पीड़िताओं ने बताया कि पुलिस ने उनके बयान ही नहीं लिए थे और न ही मेडिकल परीक्षण कराया था। उन्होंने बताया कि घर के पुरुषों को चारपाई से बांधने के बाद तीनों के साथ बर्बरता की गई। इस दौरान दो बदमाश तमंचा ताने खड़े हुए थे।
जाहिद के साथियों को खोजेगी पुलिस
कोर्ट ने प्रथम विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलिस अधिकारियों से शेष आरोपियों की गिरफ्तारी न किए जाने का कारण पूछा है। ऐसे में संभावना है कि पुलिस अब जाहिद के बयानों के आधार पर अन्य बदमाशों तक पहुंचने का प्रयास करे। एसपी चिरंजीवनाथ सिन्हा ने बताया कि प्रकरण में न्यायालय के निर्देशों के क्रम में आगे कार्यवाही की जा रही है।