ऑल इंडिया शिया सोसाइटी के बैनर तले किला गेट स्थित इमाम बारगाह हुसैनी में मुहर्रम की सातवीं तारीख पर अलम का जुलूस निकाला गया। जुलूस पहले शहीद ए करबला के बारे में बयान किया गया। जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
जुलूस से पहले मौलाना शहनशाह हुसैन जैदी ने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला में इंसानियत को कायम रखने के लिए अपनी और 71 जांनिसारों की शहादत देना गवारा किया, लेकिन जालिम यजीद की बात मानने से इंकार कर दिया। यजीद जुल्म की ताकत से इंसानियत और इस्लाम को मिटाना चाहता था। हजरत साहब ने दुनिया को पैगाम दिया कि इंसानियत पर जुल्म करने वाले जालिम के आगे झुकना नहीं चाहिए।
सातवीं मुहर्रम से यजीद ने कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके बच्चों पर पानी बंद कर दिया। इंसाफ और सच्चाई के लिए अपना पूरा परिवार कुर्बान कर दिया। जालिम मिट जाते हैं और शहीद हमेशा जिंदा रहते हैं। इस अवसर हसन मोहम्मद, जाहिद हुसैन, हामिद, आबिद, रईसुल हसन, शब्बू मियां, मुबीन, सफदर, तनवीर, कमर, चांद मियां, एजाज मेहंदी, बाकर हुसैन, रिजवान, जौली, शाकिर, इमरान, शुजा मोहम्मद, बब्बू, इरफान, शेरू, सुर्खाब, लड्डन, रजा मेहंदी, ऐनुल, जीशान, तकी, साहिल, शब्बर आदि मौजूद थे।