विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) चित्रा शर्मा के न्यायालय ने कक्षा चार के दस वर्षीय विद्यार्थी से कुकर्म के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। इन तीनों दोषियों में पति पत्नी और एक बाबा शामिल है। न्यायालय ने तीनों दोषियों को 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। घटना करीब दो वर्ष पहले की है। जब यह विद्यार्थी अपने स्कूल से घर लौट कर आ रहा था, तब दोषियों ने बालक को बहाने से बुला लिया और उसके साथ गलत काम किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना सिकंदराराऊ क्षेत्रांतर्गत एक मोहल्ले के निवासी एक व्यक्ति ने थाने में तहरीर दी थी। तहरीर में कहा था कि उनका भतीजा एक पब्लिक स्कूल में कक्षा चार का विद्यार्थी है, जिसकी उम्र 10 वर्ष है। 23 अगस्त 2022 को लगभग दोपहर 1:00 बजे स्कूल से वह घर वापस आ रहा था। तभी नामजद आरोपियों ने भतीजे को रोक लिया। उससे अश्लील हरकतें की। यौन शोषण किया। भतीजे को 4 घंटे तक रोक कर रखा। इस मामले में न्यायालय के आदेश से मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक ने विवेचना करते हुए आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) चित्रा शर्मा के न्यायालय में हुई।
न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत आरोपी पत्नी गीता देवी, पति सोनू व श्यामानंद उर्फ सत्यानंद शांति देवी बाबा को दोषी करार देते हुए बीस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। एडीजीसी मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि न्यायालय ने दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।