फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hathras News: लेबर कॉलोनी में मकान का 30 रुपये तक किराया, 216 आवंटियों में से 15 ही दे रहे

Tue, 13 Jan 2026 01:51 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
विज्ञापन
विज्ञापन
सात दशक पहले बनी लेबर कॉलोनी में 216 आवास हैं, जिनमें से मात्र 15आवासों की ही किराये की रसीद कट रही है। किराया भी छोटे क्वार्टर का 15 रुपये और बड़े क्वार्टर 30 रुपये मासिक हैं। अधिकांश आवासों पर अब दूसरे लोग काबिज हो गए हैं। शासन के निर्देश कॉलोनी की जांच करने के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है।
विज्ञापन


श्रम विभाग के अनुसार जो लोग किराया दे रहे हैं, वह ही मूल आवंटी हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन सरकारी आवासों की जमकर खरीद-फरोख्त हुई। चूंकि ये आवास हस्तांतरणीय नहीं थे, इसलिए अधिकांश सौदे शपथ पत्रों के आधार पर ही कर लिए गए। यह भी एक वजह श्रम विभाग में किराये की रसीद नहीं कटने की है।

सीडीओ की अध्यक्षता में गठित समिति में एसडीएम सदर, नगर पालिका ईओ, श्रम प्रवर्तन अधिकारी व विनियमित क्षेत्र जेई को शामिल किया गया है। यह समिति कॉलोनी की वर्तमान स्थिति, अवैध खरीद-फरोख्त और मालिकाना हक की जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेगी।
विज्ञापन


साल 1955 में श्रम विभाग ने नेशनल टैक्सटाइल कार्पोरेशन की बिजली काटन मिल के कर्मचारियों के लेबर कॉलोनी का निर्माण कराया था। उस समय इसमें 18 ब्लॉकों में कुल 216 आवासों का निर्माण कराया गया और मामूली किराये पर कर्मचारियों को यह आवास आंटित किए गए। 40 साल पहले मिल बंद हो गई। अब स्थिति यह है कि समय बीतने के साथ अधिकांश आवासों के मूल आवंटियों की या तो मृत्यु हो गई या फिर वे यहां से दूसरी जगह पर चले गए।







पालिका को नहीं मिल रहा टैक्स

लेबर कॉलोनी शुरूआत से ही नगर पालिका क्षेत्र में है। वर्ष 2016 में हुए जीआईएस सर्वे के बाद सरकारी विभागों द्वारा किए जा रहे भू उपयोग पर गृहकर तय किया था। इसमें श्रम विभाग भी शामिल था। लेबर कॉलोनी के आवासों के लिए पालिका ने 12.72 लाख रुपये का टैक्स लगाया था, जिसे चुकाने के लिए श्रम विभाग को पत्र लिखा गया था, लेकिन विभाग ने आवास में रह रहे लोगों से टैक्स वसूलने की बात कही। इस पर पालिका ने आवंटियों की जानकारी भी मांगी, लेकिन कागजी कार्यवाही में टैक्स का मामला उलझ गया।









विस्तृत सर्वे में इन बातों पर देंगे ध्यान :

-मूल आवंटी आवंटित मकानों में रह रहे हैं या नहीं

-वर्तमान में रह रहा परिवार कितने समय से रह रहा है।

-क्वार्टर व्यावसायिक उपयोग में तो नहीं लाए जा रहे।

-खुला क्षेत्र, पार्क आदि जो नक्शा था वह वर्तमान में है या नहीं।

-पालिका को मिलने वाले गृहकर व वाटर टैक्स की स्थिति।





लेबर कॉलोनी की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए कमेटी बनी है। रिपोर्ट देने के बाद शासन से जो निर्देश प्राप्त होंगे, उसके आधार पर आगे की कार्यवाही होगी।

सतेंद्र कुमार मिश्रा, श्रम प्रवर्तन अधिकारी

-

हाल ही में हुई वीडियो कान्फ्रेंसिंग में दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं। नगर पालिका टैक्स के लिए कई बार पत्र लिख चुकी है। मालिकाना विवाद के कारण टैक्स जमा नहीं हो सका है। निर्देशों के क्रम में विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद भी टैक्स आदि के संबंध में स्थिति तय होगी।
विज्ञापन


-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका

कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर। संवाद

कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर। संवाद

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें