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ऐितहािसक िकला, िकससे करे िगला

Sat, 06 Apr 2019 12:27 AM IST
Mohd Rafeek न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
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ऐतिहासिक किला परिसर में पुरातत्व विभाग की भूमि पर हो रहे अतिक्रमण। - फोटो : अमर उजाला
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हाथरस। अंग्रेजों से जंग के साक्षी रहे किला राजा दयाराम और मेला श्रीदाऊजी महाराज पर किसी सांसद ने गंभीरता नहीं दिखाई। इस स्थल को रमणीक बनाने के लिए पर्यटन विभाग, पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन ने करोड़ों की योजनाएं बनाईं। कुछ धनराशि स्वीकृत भी हुई, लेकिन हालात यह हुए कि पैरवी के बिना यह ऐतिहासिक घोषित स्थल आज अपना वजूद बचाने के लिए छटपटा रहा है। काफी जमीन पर कब्जा हो गया है। वहां बने टीलों का लगातार क्षरण हो रहा है।
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पुराने इतिहासकारों की मानें तो 1817 में इस किले और दाऊजी मंदिर पर अंग्रेजों ने हमला बोला और कई दिन तक चली जंग के बाद इस किले पर अपना कब्जा कर लिया। उस समय ये किला का राजा दयाराम था। इसके बाद 1821 में अंग्रेजी शासन ने ही इसे ऐतिहासिक स्थल घोषित किया। 3.5 हेक्टेयर जमीन, टीले और मंदिर इस ऐतिहासिक स्थल में शामिल हैं, लेकिन सालों तक इसकी किसी ने सुधि ही नहीं ली। उसके बाद शहर के कुछ समाजसेवी इसके संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए न्यायालय गए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 2004 में स्थानीय प्रशासन चेता और तब शासन ने साढ़े तीन करोड़ की योजना बनाई। इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनी। वन विभाग और पुरातत्व विभाग ने भी इसमें अपना कुछ पैसा लगाया। शासन से 36 लाख की किस्त भी मिली, लेकिन पहली किस्त भी पूरी खर्च नहीं हो पाई और पूरी योजना कागजों में दब गई।

अब हालत यह है कि पुरातन महत्व के इस स्थल की करीब 35 फीसदी जमीन पर कब्जा हो चुका है। पुरातत्व विभाग ने यहां किसी भी तरह से निर्माण आदि पर रोक लगा रखी है, लेकिन कब्जे लगातार हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक स्थल पर करीब एक माह तक मेला श्रीदाऊजी महाराज के समय तो रौनक रहती है, लेकिन उसके बाद किसी को इसकी सुधि नहीं आती। वर्तमान सांसद राजेश दिवाकर ने सौंदर्यीकरण को लेकर एक दो बार मुद्दा उठाया, लेकिन आज उसका परिणाम नहीं आया।
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