स्वीमिंग पूल में डूबकर युवक की मौत के बाद विलाप करती उसकी मां।
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हाथरस। शहर से सटे कई गांवों में अवैध रूप से मानक को ताक पर रखकर स्वीमिंग पूल संचालित हैं। इन पर नहाते समय सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। सबसे खेदजनक पहलू तो यह है कि कई स्वीमिंग पूल का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है, लेकिन प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। रविवार को जब रिंकू की ऐसे ही स्वीमिंग पूल में डूबने के बाद हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। तब भी इस स्वीमिंग पूल में काफी लोग डुबकी लगा रहे थे। पुलिस और प्रशासन इस घटना से अंजान था।
शहर से सटे कई गांवों में सड़क के किनारे स्वीमिंग पूल का धंधा इस समय जोरों पर चल रहा है। इन स्वीमिंग पूलों का न कोई रजिस्ट्रेशन है और न ही वहां सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं। प्रशासन को तो यह जानकारी भी नहीं है कि शहर में इस तरह से स्वीमिंग पूल भी हैं, जहां मौत की डुबकी लगने की भी लोगों की आशंका रहती है। रविवार को जिस स्वीमिंग पूल में घटना हुई, वहां भी सुरक्षा और स्वीमिंग पूल के कोई मानक दिखाई नहीं दिए। कई-कई दिन तक वहां का पानी नहीं बदला जाता और साफ-सफाई की भी कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। स्वीमिंग पूल को ऐसे स्थान पर बनाया गया है, जोकि रेलवे ट्रैक के बिल्कुल किनारे है।
वहां देखने में लगता ही नहीं है कि अंदर स्वीमिंग पूल जैसी चीज भी होगी। एक तरह से गड्ढों में पानी भरवाकर उसमें उछल कूद कराई जा रही है और इसका नाम स्वीमिंग पूल दे दिया गया है। स्वीमिंग पूल में कितना पानी भरा हुआ है और कितनी गहराई होनी चाहिए। इसका जवाब भी वहां तैनात कर्मचारी नहीं दे सके। मालिक उस समय मौजूद नहीं था। लोगों से 50 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से लिए जा रहे थे और शहर के लोग वहां गर्मी में आकर मौज मस्ती भी कर रहे थे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस स्वीमिंग पूल के संचालन की कोई जानकारी पुलिस प्रशासन के पास नहीं थी।