आरोप है कि अंजुला माहौर फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षित सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची हैं। उन्होंने अपना जाति प्रमाणपत्र मायके की जाति को छिपाकर ससुराल की जाति के आधार पर फर्जी रूप से तैयार कराया है। किसी भी महिला का जाति प्रमाणपत्र ससुराल पक्ष से नहीं, बल्कि उसके मायके पक्ष से ही बनाया जाता है।
एमपी एमएलए कोर्ट में विधायक अंजुला माहौर के खिलाफ दर्ज परिवाद में बुधवार को सुनवाई नहीं हो सकी। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के आह्वान पर अधिवक्ता कार्य से विरत रहे। न्यायालय ने इस प्रकरण में सुनवाई के लिए तीन अक्तूबर की तिथि नियत की है।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार विरोधी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित केशवदेव गौतम ने सदर विधायक अंजुला माहौर के जाति प्रमाणपत्र के फर्जी होने का आरोप लगाते हुए एमपी एमएलए कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया था।
गौतम का आरोप है कि अंजुला माहौर फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षित सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची हैं। उन्होंने अपना जाति प्रमाणपत्र मायके की जाति को छिपाकर ससुराल की जाति के आधार पर फर्जी रूप से तैयार कराया है। किसी भी महिला का जाति प्रमाणपत्र ससुराल पक्ष से नहीं, बल्कि उसके मायके पक्ष से ही बनाया जाता है।