विजयादशमी के पावन पर्व पर रावण का पुतला दहन होने के साथ पूरा शहर प्रभु श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। आतिशबाजी के माध्यम से असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया गया। रावण का पुतला धू-धूकर जला।
शहर के एमजी पॉलीटेक्निक मैदान में रामलीला महोत्सव में शनिवार को रावण वध लीला, युद्ध आतिशबाजी मुकाबला और विशालकाय रावण पुतला दहन देखने के लिए हजारों की तादाद में लोग पहुंचे। मैदान खचाखच भरा हुआ था। चहुुंओर श्रीराम की जय-जयकार से वातावरण गूंज उठा। रावण पुतला दहन से पूर्व राम और लक्ष्मण वानर सेना सहित रावण का वध करने के लिए शहर के विभिन्न बाजारों में होकर गुजरे। शहर भ्रमण के दौरान राम, लक्ष्मण, हनुमान जी के स्वरूपों की जगह-जगह पुष्प वर्षाकर आरती उतारी गई।
रावण पुतला दहन देखने के लिए शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की भीड़ भी उमड़ी। रावण के पुतले को करीब से देखने के लिए भीड़ उतावली रही, जबकि पुलिस फोर्स ने कई बार भीड़ को पुतले तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की। जब भीड़ नहीं मानी तो पुलिस को लाठियां भांजकर सख्ती भी बरतनी पड़ी, जिससे कई बार मैदान पर भगदड़ और अफरा-तफरी के हालात भी बने। हालांकि भीड़ की रोकथाम के लिए रावण के पुतले के चारों तरफ बेरीकेडिंग का सख्त सुरक्षा घेरा बनाया गया था।