शाम से देर रात तक देवी के मनोहारी शृंगार की एक झलक पाने के लिए भक्त उमड़ते रहे। पूरा वातावरण घंटों की टंकार और महामाई के जयकारों से गूंजता रहा।मां कालरात्रि की पूजा विशेषकर काले तिलों से की जाती है, इसलिए सभी भक्तों ने जलाभिषेक के साथ देवी को पुष्प, गुगर, लौंग के अलावा काले तिल अर्पित कर मनौती मांगी। रविवार को शहर के देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही।
शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना विधि विधान से की गई। भक्तों ने देवी को जल, पुष्प और काले तिला चढ़ाकर मनोकामना पूर्ति की कामना की। दोपहर तक मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। शाम से देर रात तक देवी के मनोहारी शृंगार की एक झलक पाने के लिए भक्त उमड़ते रहे। पूरा वातावरण घंटों की टंकार और महामाई के जयकारों से गूंजता रहा।
मां कालरात्रि की पूजा विशेषकर काले तिलों से की जाती है, इसलिए सभी भक्तों ने जलाभिषेक के साथ देवी को पुष्प, गुगर, लौंग के अलावा काले तिल अर्पित कर मनौती मांगी। रविवार को शहर के देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही।
बौहरे वाली देवी मंदिर पर भक्तों की भीड़ रही। इसके अलावा शीतला माता मंदिर, वाराही माता मंदिर, पथवारी मंदिर, शांता माता मंदिर, चामुंडा मंदिर, अन्नपूर्णा माता मंदिर आदि सभी देवालयों में मां काली की कृपा की प्राप्ति के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। संवाद