न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरसान (हाथरस)
विकास खंड के गांव बामौली में 25 साल बाद लोगों ने प्रधान पद के लिए मतदान किया। इस बार यहां इस पद के लिए सहमति नहीं बन सकी। ग्राम पंचायत के 80 मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची से गायब होने की शिकायत आई, जिससे यह लोग मतदान करने से वंचित रह गए।
इन लोगों ने इसकी शिकायत अधिकारियों से भी की, लेकिन अधिकारी बिना कोई ठोस आश्वासन दिए चले गए। गांव बमौली पूर्व मंत्री और सादाबाद विधायक रामवीर उपाध्याय का गांव है। जब से रामवीर उपाध्याय राजनीति में आए हैं, तब से इस गांव में प्रधान के लिए निर्विरोध निर्वाचन होने लगा। चुनाव से पहले गांव में एक पंचायत हो जाती और सभी लोग आम सहमति से उपाध्याय परिवार के किसी सदस्य की मौजूदगी में उस पर मुहर लगा देते, लेकिन इस बार सहमति नहीं बन पाई। गांव के कुछ युवाओं ने इस बार नहीं मानी और वह चुनाव पर अड़ गए।
ऐसे में इस बार वहां 25 साल बाद वोट पड़े। इधर, गांव के करीब 80 लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब थे। इन लोगों का कहना था कि गांव के लोगों ने पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में अपने नाम की जांच नहीं कराई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह काम प्रशासन की अनदेखी या किसी व्यक्ति ने द्वेष भावना के तहत कराया गया है। मतदान से वंचित लोगों ने बृहस्पतिवार को गांव के बूथ पर आने वाले अधिकारियों से मतदान करने की गुहार लगाई, लेकिन अधिकारियों ने भी मतदाता सूची में नाम न होने के कारण कोई आश्वासन नहीं दिया।