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हाथरस : जांच रिपोर्ट पॉजिटिव बताकर कोविड अस्पताल भेजने को कहा और फिर मांगे दस हजार रुपये

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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कोविड जांच के नाम पर जिले में खूब खेल हो रहा है। लोगों को कोरोना का भय दिखाकर उन्हें जबरन कोविड अस्पतालों में भेजा जा रहा है। ऐसे ही एक मामला यहां सामने आया है। एक संविदा सरकारी चिकित्सक व उसके एक साथी पर पर कोविड जांच को पॉजिटिव बताकर एक महिला को प्राइवेट अस्पताल में भेजने लगा। उस पर अस्पताल न भेजने के लिए दस हजार रुपये मांगने का आरोप लगा है। इस मामले में सीएमओ का कहना है कि अभी उन्हें शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर वह जांच कराएंगे।
स्थानीय बसंत बाग निवासी उद्यमी मुकेश आंधीवाल की कॉलोनी में जब कई लोग पॉजिटिव निकल आए तो उन्होंने और उनकी पत्नी व बेटे ने भी अपनी जांच कराई। यह जांच निगेविट आई। उसके बाद उनकी पत्नी रजनी आंधीवाल को उच्च रक्तचाप की शिकायत पांच मई को हुई तो उनके रिश्तेदार ने उन्हें फिर से कोरोना की जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने अगले दिन छह मई को बागला जिला चिकित्सालय में जाकर फिर अपनी जांच कराई। एंटीजन जांच निगेटिव आई। उसके बाद उनके परिचित एक चिकित्सक ने उन्हें आरटीपीसीआर जांच करने के लिए सिटी स्टेशन बुला लिया।
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यह चिकित्सक इस समय स्वास्थ्य विभाग में भी संविदा पर है। वह अपने बेटे के साथ जांच कराने के लिए सिटी स्टेशन चली गई। बताते हैं कि वहां उनकी जांच पॉजिटिव बताकर कहने लगा कि अब वह घर नहीं जा सकेंगी और उन्हें सिकंदराराऊ के कोविड अस्पताल भेजा जाएगा। आरोप है कि उनके बेटे ने जब यह कहा कि सुबह की रिपोर्ट सही आई है और ऑक्सीजन का स्तर भी सही है, शासन ने भी यह कह रखा कि किसी मरीज को इस स्थिति में होम आइसोलेशन में ही भेजा जाए तो आखिर कोविड अस्पताल में क्यों भेजा जा रहा है।
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आरोप है कि इसी बहस के बीच वहां एक युवक और आ गया और वह कोविड अस्पताल न भेजने के एवज में दस हजार रुपये मांगने लगा। इसकी जानकारी जब मुकेश आंधीवाल को हुई तो उन्होंने कुछ लोग वहां भेज दिए। शोरगुल बढ़ता देख वहां से यह संविदा चिकित्सक व उसके साथ के युवक गायब हो गए। इस पूरे मामले की शिकायत सीएमओ से की गई है। वहीं सीएमओ ब्रजेश राठौर का कहना है कि उन्हें अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर वह इसकी जांच कराएंगे।
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