न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
भीषण गर्मी में उपभोक्ताओं को बिजली विभाग आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। रविवार को शहर वाटर वर्क्स, कांशीराम टाउनशिप उपकेंद्र की लाइन पर खंभा बदलने का काम किया गया। इस कारण सुबह नौ बजे से दोपहर बारह बजे तक सात हजार घरों में बिजली ठप रही। बिना बिजली के लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई। पर्याप्त बिजली न मिलने से शहर के लोगों में गुस्सा है।
उल्लेखनीय है कि शहर, गांव और कस्बों में आए दिन बिजली की कटौती की जा रही है। कभी दिन में तो कभी रात में बिजली गुल होना आम बात हो गई है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। रविवार को शहर के कांशीराम टाउनशिप, वाटर वर्क्स विद्युत उपकेंद्र की लाइन पर 11 केवीए के खंभे बदलने का काम हुआ।
इस कारण चामड़ गेट, तरफरा रोड, कोर्ट फीडर, शिव कॉलोनी सहित कई इलाकों में सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक बिजली गुल रही। बिना बिजली के लोग जरूरी कामकाज नहीं कर सके। घरों में लगे विद्युत उपकरण शोपीस बने रहे। लोग बिजली आने का इंतजार करते रहे। दोपहर में बिजली आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। उपखंड अधिकारी (एसडीओ) पवन वर्मा का कहना है कि 11 केवीए का खंभा बदलने के चलते कुछ घंटे आपूर्ति प्रभावित हो रही है। संवाद
शिव कॉलोनी में पूरी रात बाधित रही बिजली
शहर के गिजरौली विद्युत उपकेंद्र से आने वाले टाउन तीन फीडर की लाइन में फॉल्ट हो गया। यहां तैनात लाइनमैन शटडाउन का खेल खेल रहे हैं। खुद समस्या को बढ़ाकर लोगों के लिए सिरदर्द पैदा कर रहे हैं। संविदा कर्मियों की लापरवाही के चलते काफी घरों में पूरी रात बिजली ने आंखमिचौली का खेल खेला। इस कारण लोग चैन से सो नहीं सके। सुबह नौ बजे करीब बिजली आई तब जाकर लोगों ने राहत महसूस की। रविवार की शाम को फिर काफी देर तक बिजली गुल रही। पर्याप्त बिजली न मिलने से लोगों में गुस्सा है।
भीषण गर्मी में पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। इस कारण खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी समस्या पर ध्यान देने की बजाय खानापूर्ति कर रहे हैं।
-संदीप शर्मा
कभी दिन में कभी रात में बिजली गुल होना आम बात हो गई है। बिजली न मिलने के कारण कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। संबधित अधिकारियों के फोन तक नहीं उठते हैं। काफी परेशानी हो रही है।
-विकास शर्मा
गर्मी में बिजली से संबंधित समस्याओं को दूर करने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। इस कारण कई कई घंटे बिना बिजली के रहना पड़ रहा है। अधिकारी समस्या को गंभीरता से लें, ताकि राहत मिले।
- धीरेंद्र वर्मा