न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पूरे साल सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर रहीं। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों और संसाधनों का संकट रहा। जिला अस्पताल रेफर सेंटर बना रहा। जिले में मेडिकल कॉलेज नहीं बन पाया। रक्त अवयव इकाई भी शुरू नहीं हो सकी। जिला अस्पताल में कई बार हंगामा भी हुआ। आशा और वाहन चालक के बीच मारपीट की गूंज शासन तक पहुंची, अलबत्ता इस साल जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट जरूर शुरू हो गई।
जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लचर है। इस साल भी इसमें कोई खास सुधार नहीं हुआ। प्रदेश के कई जिलों में मेडिकल कॉलेज खुल गए हैं और इनसे मरीजों को काफी लाभ भी हो रहा है, लेकिन इस जिले में इस साल भी मेडिकल कॉलेज नहीं खुला। पूरे साल जिला अस्पताल की इमरजेंसी रेफर सेंटर बनी रही। देहात में भी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति यही रही। इसकी मुख्य वजह संसाधनों के साथ पर्याप्त चिकित्सकों की तैनाती न होना रही।
चिकित्सकों के अभाव में मरीज रहे परेशान
बागला जिला अस्पताल में चिकित्सकों के स्वीकृत पद 25 है, जबकि यहां केवल 12 की तैनाती है। ओपीडी में तो रोजाना चार या पांच चिकित्सक की मरीजों के उपचार के लिए उपलब्ध रहते हैं। पूरे साल यही स्थिति रही। इसके अलावा जिला महिला अस्पताल में 14 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष आठ की तैनाती है। एक चिकित्सक ने इस्तीफा दे रखा है और एक चिकित्सक बिना किसी सूचना के गैरहाजिर है। ऐसे में यहां भी चिकित्सकों की किल्लत रही।
टीबी मरीजों को इलाज के लिए झेलनी पड़ी परेशानी
यहां एमडीटीबी अस्पताल में टीबी के मरीजों का इलाज होता है, लेकिन यह अस्पताल कोविड अस्पताल के रूप में तब्दील रहा तो टीबी के मरीज उपचार के लिए काफी परेशान रहे। उन्हें भर्ती भी नही किया गया। इधर, इस साल मई के महीने में ही ब्लड बैंक में रक्त अवयव इकाई शुरू होनी थी, लेकिन इसके उपकरण नहीं आए और इसकी वजह से यह इकाई शुरू नहीं हो पाई, अलबत्ता इस साल डायलिसिस यूनिट जरूर शुरू हो गई और इसका मरीजों को लाभ भी मिला। जिला अस्पताल परिसर में 32 बेड के वार्ड के लिए भवन भी तैयार हो चुका है।
कई बार हुआ हंगामा
जिले के सरकारी अस्पतालों में कई बार हंगामा भी हुआ। पिछले दिनों आशा कार्यकर्ता और एक वाहन चालक के बीच हुई मारपीट का मामला काफी सुर्खियों में रहा। इसे लेकर खासा हंगामा रहा और डिप्टी सीएम ने भी मामले का संज्ञान लिया। यह मामला लेन-देन का था। कई अन्य मामलों में भी हंगामा हुआ। संवाद