न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरसमंडी समिति में इन-दिनों आढ़तियों को धान खराब होने का डर सता रहा है, क्योंकि लगातार हो रही बारिश के चलते तिरपाल में भी पानी को रोक पाना मुश्किल हो रहा है। बीते दिनों मंडी समिति में 30 से 40 हजार क्विंटल धान पहुंच गया। मंडी में चारों ओर धान की आवक प्रभावित होने से सन्नाटा पसरा हुआ है।
मंडी समिति में इन-दिनों आढ़तियों को धान खराब होने का डर सता रहा है, क्योंकि लगातार हो रही बारिश के चलते तिरपाल में भी पानी को रोक पाना मुश्किल हो रहा है। बीते दिनों मंडी समिति में आया हजारों क्विंटल धान अभी मिलों तक नहीं पहुंचा है। आढ़तियों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
उल्लेखनीय है कि जिले में धान का अधिक उत्पादन होता है। बीते दिनों मंडी समिति में 30 से 40 हजार क्विंटल धान पहुंच गया। धान के पहुंचने के अगले दिन शुक्रवार की रात से बारिश की शुरुआत हो गई। आढ़तिया धान को भीगने से बचाने के लिए तिरपाल आदि डाल दिए। आढ़तियों ने सोचा कि मौसम खुलने के साथ धान मिलों भेजेंगे। अब कई दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण धान मंडी से बाहर नहीं निकल पाया है।
आढ़तियों द्वारा धान को भीगने से बचाने के लिए तिरपाल व टिनशेड का सहारा ले रहे हैं, ताकि धान बचा रहे। मंडी में चारों ओर धान की आवक प्रभावित होने से सन्नाटा पसरा हुआ है। पल्लेदार भी हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं। उनके सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। संवाद