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हाथरस : ...तो इस बार भी नालियों में बह गया बारिश का पानी

सार

जिले इस बार हुई बारिश का पानी भी भूगर्भ जल का स्तर बढ़ाने में कारगर साबित नहीं हो सका है।इस भूगर्भ जल स्तर को बचाने के लिए शासन से कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह प्रयास जमीनी हकीकत से अभी कोसों दूर हैं।वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न लगाने वाले फैक्टरी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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विस्तार
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प्रशांत भारती
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हाथरस। जिले इस बार हुई बारिश का पानी भी भूगर्भ जल का स्तर बढ़ाने में कारगर साबित नहीं हो सका है। बारिश का पानी फिर से इस बार नालियों में बहकर ही चला गया। सरकारी, निजी और व्यावसायिक भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था न होने के कारण इस जल का संचयन नहीं किया जा सका।
हालांकि भूगर्भ जल विभाग ने जिले के 40 फैक्टरी संचालकों से पूर्व में छह माह में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के संबंध में शपथपत्र लिए थे, लेकिन अभी तक महज आठ फैक्टरी संचालकों ने ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए हैं। अब शेष फैक्टरी संचालकों पर विभाग की ओर से जल्द कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में भूगर्भ जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इस भूगर्भ जल स्तर को बचाने के लिए शासन से कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह प्रयास जमीनी हकीकत से अभी कोसों दूर हैं। यहां सरकारी भवनों, निजी व व्यावसायिक भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बने हैं। इस कारण हर वर्ष होने वाली वर्षा का जल नालियों में बह जाता है।
इस कारण कई ब्लॉक तो अतिदोहित श्रेणी में जा चुके हैं। यहां तक कि भूगर्भ जल अधिनियम 2019 के तहत सभी फैक्टरी संचालकों ( केमिकल फैक्टरी को छोड़कर) को वाटर संचयन सिस्टम लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन फैक्टरी संचालकों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही हैं। इस बारे में इन फैक्टरी संचालकों से छह महीने में सिस्टम लगाने को लेकर भूगर्भ जल विभाग की ओर से शपथपत्र भी लिए गए हैं, लेकिन अभी तक 40 में से महज आठ फैक्टरी संचालकों ने ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया है। संवाद
300 वर्ग मीटर के भवनों में अनिवार्य है वाटर रिचार्ज की व्यवस्था
हाथरस। भूगर्भ जल अधिनियम के तहत वर्षा जल संचयन के लिए मानक का निर्धारण किया गया है। इसके तहत 300 वर्ग मीटर से बड़े के घरेलू व व्यावसायिक भवनों में वर्षा जल संचयन करने के निर्देश जारी किए हैं। इस आधार पर भवन निर्माण के दौरान नक्शे की स्वीकृति के समय संबंधित अधिकारियों को नक्शे में वाटर रिचार्ज की व्यवस्था को देखने के भी निर्देश जारी किए गए हैं। वाटर रिचार्ज की व्यवस्था न होने की दशा में संबंधित विभागीय अधिकारी नक्शे की स्वीकृति पर आपत्ति भी दर्ज करा सकता है।
स्कूल भवनों में नहीं है वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था
हाथरस। लघु सिंचाई विभाग की ओर से जिले के बड़े स्कूल संचालकों को भूगर्भ जल अधिनियम के तहत वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए निर्देश जारी किए हैं। हैरानी की बात यह है कि अभी तक किसी भी स्कूल के भवन में वाटर हार्वेस्टिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण इन भवनों की छतों पर एकत्रित होने वाला वर्षा का जल इस बार फिर नालियों के सहारे बह गया है। लघु सिंचाई विभाग की ओर से जिले के 46 विद्यालयों को भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अभी तक किसी भी विद्यालय में यह सिस्टम नहीं लगाया गया है।
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ब्लॉक - श्रेणी - जमीन से भूगर्भ जलस्तर मीटर में
मुरसान - अति दोहित - 17.84
सादाबाद - सेमी क्रिटिकल - 26.45
हाथरस - क्रिटिकल - 16.89
सासनी - अति दोहित - 20.88
सहपऊ - अति दोहित - 20.41
हसायन - सुरक्षित - 4.84
सिकंदराराऊ - क्रिटिकल - 9.64
विभाग की ओर से सभी विद्यालयों को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। यहां तक कि फैक्टरी संचालकों से भूगर्भ जल विभाग की ओर से इस सिस्टम को लगाने के लिए शपथ पत्र भी लिए गए हैं। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न लगाने वाले फैक्टरी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भूगर्भ जल स्तर को बचाने के लिए तमाम प्रयास जारी हैं।
-अमित कुमार, सहायक अभियंता लघु सिंचाई।
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