न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिले की सभी ग्राम पंचायतों को भले ही खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) घोषित कर शासन व प्रशासन ने इतिश्री कर ली हो, लेकिन आजादी के 75 साल बाद भी जिले के कई गांव ऐसे हैं, जहां ग्रामीण आज भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। जिले के 1138 लोगों ने व्यक्तिगत शौचालय के लिए आवेदन किए हैं, लेकिन यह आज तक लंबित हैं। गांवों में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सामुदायिक शौचालयों पर भी ताला लटका हुआ है।
एसबीएम के तहत जिले की सभी ग्राम पंचायतों को पूर्व में ओडीएफ घोषित किया गया है। यहां तक शासन के निर्देश पर ओडीएफ प्लस के तहत अब वर्तमान में गीला कचरा व सूखा कचरा और सोख पिट आदि बनाए जाने की पहल की जा रही है। शासन स्तर से इसके लिए जिले की 10 ग्राम पंचायतों को बजट भी जारी कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि ओडीएफ प्लस के तहत सभी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया, ताकि सार्वजनिक स्थलों पर ग्रामीण शौच न कर सकें और राहगीरों को भी खुले में शौच न करना पड़े।
मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च कर सामुदायिक शौचालय तो बनाए गए, लेकिन समय के साथ इन शौचालयों पर ताले लटके हुए हैं या जर्जर अवस्था में खड़े हुए हैं। प्रत्येक माह इन शौचालयों के रखरखाव के लिए केयर टेकरों को मानदेय का भी भुगतान किया जाता है। संवाद
एक साल पहले बना शौचालय एक दिन भी नहीं खुला
हाथरस। विकास खंड सादाबाद की ग्राम पंचायत पट्टी बहराम में करीब एक साल पहले सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया गया। निर्माण के बाद इसके गेट पर ताले लगा दिए गए, जोकि आज तक नहीं खुल सके हैं। शौचालय में बनाए गड्ढे भी बंद नहीं कराए गए हैं। इस ओर से विभागीय अफसर उदासीन बने हुए हैं। संवाद
निर्माण के बाद अब तक केयरटेकर की नहीं तैनाती
हाथरस। ब्लॉक सहपऊ की ग्राम पंचायत परसौरा में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत सामुदायिक शौचालय बनाया गया है। शौचालय के निर्माण के बाद अभी तक इसकी देखरेख के लिए किसी की भी तैनाती नहीं हुई है। इस कारण यह जर्जर अवस्था में तब्दील होता जा रहा है। संवाद